जब बात दुनिया की सबसे बड़ी मशीनरी या निर्माण की आती है, तो अक्सर हमारा ध्यान गगनचुंबी इमारतों या विशाल जहाजों पर जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जमीन के हजारों किलोमीटर नीचे एक ऐसा सुपरहाईवे बिछा है, जो आधी दुनिया की रफ्तार को नियंत्रित करता है? हम बात कर रहे हैं दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइपलाइन द्रुज्बा (Druzhba Pipeline) की. यह महज लोहे की एक नली नहीं है, बल्कि यूरोप और रूस के बीच ऊर्जा के लेन-देन की वह जीवनरेखा है, जिसके बिना कई देशों के पहिये थम सकते हैं.इस विशालकाय पाइपलाइन का नाम द्रुज्बा रखने के पीछे एक खास संदेश छिपा है. रूसी भाषा में ‘द्रुज्बा’ का शाब्दिक अर्थ ‘दोस्ती’ होता है. इस नाम को चुनने का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के दौर में पड़ोसी देशों के साथ आपसी सहयोग और ऊर्जा की निरंतर सप्लाई के जरिए मजबूत संबंध बनाना था.
दशकों पुरानी यह पाइपलाइन आज भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में दोस्ती और भरोसे का एक बड़ा प्रतीक मानी जाती है, जो कई सीमाओं को पार कर एक देश को दूसरे देश से जोड़ती है. इंजीनियरिंग के नजरिए से देखें तो द्रुज्बा पाइपलाइन किसी चमत्कार से कम नहीं है. इसकी कुल लंबाई 4,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है. यह इतनी लंबी है कि अगर इसे सीधा बिछाया जाए, तो यह भारत के उत्तर से दक्षिण तक की दूरी से भी अधिक होगी. यह पाइपलाइन ऊबड़-खाबड़ जमीनों, घने जंगलों और कई देशों की सीमाओं को पार करती है. जमीन के अंदर दबी होने के बावजूद यह हर पल लाखों बैरल कच्चे तेल को एक छोर से दूसरे छोर तक सुरक्षित पहुंचाने का काम करती है.द्रुज्बा पाइपलाइन का रूट इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण इंटरनेशनल तेल सप्लाई नेटवर्क बनाता है. इसकी शुरुआत रूस से होती है और यह आगे चलकर दो मुख्य शाखाओं में बंट जाती है. इसकी उत्तरी शाखा पोलैंड और जर्मनी जैसे औद्योगिक देशों तक पहुंचती है, जबकि दक्षिणी शाखा हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य जैसे देशों की तेल की जरूरतों को पूरा करती है. यह पाइपलाइन एक ऐसे जाल की तरह काम करती है, जिससे यूरोप की बड़ी रिफाइनरियों और फैक्ट्रियों को कच्चा तेल मिलता है.मौजूदा दौर में रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने द्रुज्बा पाइपलाइन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. युद्ध की वजह से यूरोप के कई देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए और ऊर्जा के नए विकल्प तलाशने शुरू किए, लेकिन इसके बावजूद यह पाइपलाइन आज भी एक बड़ा सहारा बनी हुई है. कई यूरोपीय देशों के लिए इस पाइपलाइन का विकल्प तुरंत ढूंढ पाना असंभव जैसा है. यही वजह है कि युद्ध के तनाव के बीच भी इस पाइपलाइन के जरिए तेल की आवाजाही को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहती हैं.
द्रुज्बा पाइपलाइन: दुनिया की सबसे लंबी तेल लाइन, यूरोप की ऊर्जा लाइफलाइन

