AAP सांसद राघव चड्ढा ने आरोपों को बताया झूठा, संसद में जनता मुद्दे उठाने का दावा

आम आदमी पार्टी और उसके राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा के बीच शनिवार को उस समय जुबानी जंग तेज हो गई, जब राघव चड्ढा ने पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ ‘‘सुनियोजित अभियान’’ चलाया गया है. आरोपों को ‘‘झूठा’’ करार देते हुए राघव चड्ढा ने कहा, ‘‘मैंने हमेशा संसद में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया है; मैं वहां सरकार पर दबाव डालने के लिए हूं, हंगामा करने के लिए नहीं.’’ फिल्म ‘‘धुरंधर’’ के एक संवाद का सहारा लेते हुए राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘हर झूठ का पर्दाफाश होगा. क्योंकि मैं घायल हूं इसलिए घातक हूं.’’ राघव चड्ढा की यह प्रतिक्रिया आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा उन पर किए गए तीखे हमले के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ संसद में आवाज उठाने से कतराने का आरोप लगाया गया था.राज्यसभा में ‘आप’ के उपनेता पद से हटाए जाने के एक दिन बाद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को कहा था कि ‘‘मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना.’’ राघव चड्ढा ने इस आरोप को ‘‘सरासर झूठ’’ बताया कि उन्होंने विपक्षी दलों के साथ बहिर्गमन नहीं किया. उन्होंने अपने आलोचकों को चुनौती दी कि वे एक भी ऐसा उदाहरण पेश करें जहां उन्होंने (बहिर्गमन में) भाग नहीं लिया हो. राघव चड्ढा ने कहा, ‘‘मुझ पर पहला आरोप यह लगाया गया कि मैंने विपक्ष के साथ बहिर्गमन नहीं किया. यह सरासर झूठ है, और मैं आपको (आम आदमी पार्टी) चुनौती देता हूं कि आप मुझे एक भी उदाहरण, एक भी घटना बताइए, जहां विपक्ष ने बहिर्गमन किया हो और मैंने उनका समर्थन न किया हो. संसद में हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. मुझे फुटेज दिखाइए, सब स्पष्ट हो जाएगा.’’ AAP सांसद ने कहा, ‘‘वे कह रहे हैं कि मैं डरा हुआ हूं इसीलिए बेकार के मुद्दे उठा रहा हूं. मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैं संसद में हंगामा करने, चिल्लाने, माइक तोड़ने या अपशब्द कहने नहीं गया था. मैं वहां लोगों की समस्याओं को उठाने गया था.’’ उन्होंने कहा कि संसद में उनका ध्यान जीएसटी, आयकर, दिल्ली में वायु प्रदूषण, पंजाब में जल संबंधी समस्याएं, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, रेल यात्री मुद्दे, बेरोजगारी और महंगाई जैसे सार्वजनिक मुद्दों को उठाने पर रहा है. राघव चड्ढा ने कहा कि वह संसद में हंगामा करने के लिए नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने जाते हैं, क्योंकि यह करदाताओं के पैसे से चलती है और लोगों की चिंताओं को उजागर करना उनकी जिम्मेदारी है.

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