गुरुर :1 मार्च को हादसा, 9 अप्रैल को एफआईआर, सेटिंग बैठाने को लेकर 39 दिन तक सिस्टम रहा सोता

संवाददाता || यशवंत विश्वकर्मा ||

1 मार्च को हादसा, 9 अप्रैल को एफआईआर, सेटिंग बैठाने को लेकर 39 दिन तक सिस्टम रहा सोता
– महिला की मौत पर मैनेजर पर एफआईआर, कंपनी मालिक को क्लीनचिट आखिर क्यों?
– बालोद जिले में कारखाना व श्रम कानून का गजब माखौल उड़ाया जा रहा

गुरुर (बालोद)। बालोद जिले से जो खबर सामने आई है, वह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि यह सीधे-सीधे लापरवाही, गैरजिम्मेदारी और सिस्टम की सुस्ती का खुला सबूत है। सबसे चौंकाने वाली बात हादसा 1 मार्च को हुआ, लेकिन एफआईआर 9 अप्रैल को दर्ज की गई। यानि पूरे 39 दिन तक सिस्टम सोता रहा। आखिर किसका इंतजार किया जा रहा था? क्या एक मजदूर की जान की कोई कीमत नहीं है या फिर दोषियों को बचाने का खेल चल रहा है?
बता दें कि ग्राम कुम्हारखान स्थित मोहन फूड्स राइस मिल में 35 वर्षीय मजदूर केशर बाई ठाकुर की मौत 1 मार्च को जिस तरह हुई, उसने रूह तक कंपा दी है। दो साल से मेहनत कर रही एक महिला मजदूर रोज की तरह काम पर पहुंचती है और फिर चावल के टैंक में जिंदा दफन हो जाती है। यह दुर्घटना नहीं, यह एक खामोश हत्या जैसी लगती है। जांच में मिल मालिक ने बड़ी आसानी से जिम्मेदारी मैनेजर शत्रुघन मंडावी पर डाल दी और पुलिस ने भी उसी आधार पर केस दर्ज कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ मैनेजर ही दोषी है? मिल संचालक पर कोई अपराध नहीं बनता।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलती है। जहां मजदूरों से काम तो लिया जाता है, लेकिन उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है। अगर आज भी इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और केशर बाई इसी तरह चुपचाप मौत के मुंह में धकेल दी जाएगी। असली गुनहगार यानी कंपनी मालिक पर 39 दिन तक एफआईआर क्यों नहीं की गई?

क्यों नहीं थे सुरक्षा इंतजाम, अफसर मौन
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कंपनी में आखिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई। जिम्मेदार जिला प्रशासन के अफसर आखिर कंपनियों की जांच क्यों नहीं करते। जहां हादसा हुआ, वहां आखिर उस टैंक के पास सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं थे, वहां रेलिंग क्यों नहीं थी, क्या कोई सेफ्टी कवर था, क्या मजदूरों को ट्रेनिंग दी गई थी या फिर सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा था?

मैनेजर पर जिम्मेदारी, मालिक को बचा रहे
जांच के दौरान राइस मिल संचालक जागेंद्र किरी से पूछताछ की गई। उन्होंने पुलिस को बताया कि मिल की देखरेख, सुरक्षा और संचालन की पूरी जिम्मेदारी मैनेजर शत्रुघन मंडावी की है। इसके समर्थन में नियुक्ति पत्र भी प्रस्तुत किया।

कारखाने में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने राइस मिल में सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि क्या स्टोरेज टैंक के पास पर्याप्त सुरक्षा उपाय थे? क्या मजदूरों को सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया था? क्या वहां कोई निगरानी या सेफ्टी गार्ड मौजूद था? अगर उचित सुरक्षा इंतजाम होते, तो शायद एक मजदूर की जान बचाई जा सकती थी। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही का परिणाम प्रतीत होता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में दोषी कंपनी मालिक पर भी अपराध दर्ज होना चाहिए।

वर्सन
हादसे के बाद मर्ग कायम किया गया था। जांच के बाद धारा 304 कायम किया गया है। मामले की जांच जारी है।
– टीआई पुरुर

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