उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अभी से बड़ा मंथन शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों के टिकट पर दोबारा विचार कर रही है। यानी 2027 में बीजेपी कई सीटों पर पुराने चेहरों को हटाकर नए उम्मीदवारों को मैदान में उतार सकती है।
सबसे ज्यादा बदलाव की चर्चा अवध क्षेत्र में है, जहां करीब 26 से 28 सीटों पर मौजूदा विधायकों की स्थिति को लेकर सवाल उठे हैं।
दरअसल, 2024 लोकसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिलने के बाद बीजेपी ने यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने विधायकों और संगठन की स्थिति का फीडबैक लेना शुरू किया है। पार्टी के आंतरिक सर्वे में विधायकों की लोकप्रियता, जनता की नाराजगी, संगठन के साथ तालमेल और क्षेत्र में उनकी सक्रियता जैसे कई पहलुओं को देखा गया है।
सूत्रों के मुताबिक करीब 125 से 128 विधायकों की स्थिति कमजोर बताई गई है। हालांकि, अभी टिकट काटने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। चुनाव के करीब पार्टी एक बार फिर ग्राउंड रिपोर्ट और सर्वे के आधार पर उम्मीदवारों का फैसला कर सकती है।
आखिर विधायकों से नाराजगी की वजह क्या है?
पहली वजह है कार्यकर्ताओं से दूरी।
कई विधायकों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी की बात सामने आई है। आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद कुछ विधायक संगठन के स्थानीय कार्यकर्ताओं से दूरी बना बैठे। थाने, तहसील और ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं की समस्याएं हल नहीं होने की शिकायतें भी फीडबैक में शामिल हैं।
दूसरी वजह है स्थानीय मुद्दों पर कमजोर पकड़।
सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, विकास कार्य और स्थानीय समस्याओं को लेकर जनता की नाराजगी भी बीजेपी के सर्वे में सामने आने की बात कही जा रही है। कुछ इलाकों में छुट्टा पशु और बिजली मीटरिंग जैसे मुद्दे भी विधायकों के खिलाफ माहौल बनाने वाले कारण बताए जा रहे हैं।
तीसरी वजह है व्यवहार और विवाद।
कुछ विधायकों और उनके करीबियों के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय प्रशासन के साथ तालमेल, ठेके-पट्टों और क्षेत्र में दबदबे से जुड़े सवाल भी पार्टी के लिए चिंता का विषय बताए जा रहे हैं।
चौथी वजह ह

