पूर्वांचल की सियासत में एक बार फिर अमरमणि त्रिपाठी की सक्रियता चर्चा में है। पूर्व मंत्री और विधायक रहे अमरमणि त्रिपाठी हाल ही में गोरखपुर एयरपोर्ट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के स्वागत के दौरान नजर आए। इसके बाद महाराजगंज में हुई कांग्रेस की बैठक में भी उनकी मौजूदगी देखी गई। अमरमणि की कांग्रेस नेताओं के साथ तस्वीर सामने आने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दरअसल, कुछ दिन पहले ही अमरमणि त्रिपाठी ने महाराजगंज की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। उन्होंने खुद फरेंदा सीट से चुनाव लड़ने की बात कही थी, जबकि नौतनवा सीट से अपने बेटे और पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी को मैदान में उतारने की घोषणा की थी।
इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि अमरमणि किस राजनीतिक दल के साथ जाएंगे या फिर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। अब कांग्रेस नेताओं के साथ उनकी लगातार मौजूदगी ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।
कांग्रेस नेताओं के साथ दिखे अमरमणि
मंगलवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्वांचल प्रभारी अभिषेक दत्त और कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत गोरखपुर पहुंचे थे। यहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसी दौरान अमरमणि त्रिपाठी भी कांग्रेस नेताओं के स्वागत में मौजूद दिखाई दिए।
इसके बाद महाराजगंज में आयोजित कांग्रेस की बैठक में भी अमरमणि त्रिपाठी की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी। खास बात ये है कि सुप्रिया श्रीनेत का महाराजगंज से पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है। ऐसे में अमरमणि का कांग्रेस नेताओं के साथ दिखाई देना पूर्वांचल की राजनीति में एक अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या कांग्रेस में होगी वापसी?
अमरमणि त्रिपाठी का पूर्वांचल की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रहा है। वह महाराजगंज क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके हैं। उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी भी विधायक रह चुके हैं। अमरमणि के जेल में रहने के दौरान भी उनके बेटे ने चुनाव जीतकर विधानसभा में जगह बनाई थी।
एक दौर में अमरमणि त्रिपाठी को पूर्वांचल की राजनीति का प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारों में उनकी मजबूत पकड़ की चर्चा होती रही है।
हालांकि, मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सजा के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता पर ब्रेक लग गया था। अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। दोनों को अच्छे आचरण के आधार पर 2023 में जेल से रिहा किया गया।
जेल से बाहर आने के बाद अमरमणि के राजनीतिक भविष्य को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। अब कांग्रेस नेताओं के साथ उनकी तस्वीर और पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी ने नई सियासी चर्चा को जन्म दे दिया है।
पूर्वांचल में बदलेंगे सियासी समीकरण?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमरमणि त्रिपाठी कांग्रेस के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू करने जा रहे हैं? क्या कांग्रेस उन्हें 2027 विधानसभा चुनाव में मैदान में उतार सकती है? और अगर ऐसा होता है तो महाराजगंज के साथ-साथ पूर्वांचल की राजनीति पर इसका कितना असर पड़ेगा?
फिलहाल कांग्रेस या अमरमणि त्रिपाठी की तरफ से पार्टी में शामिल होने या टिकट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह अमरमणि कांग्रेस नेताओं के साथ नजर आ रहे हैं, उससे उनकी संभावित ‘कांग्रेस वापसी’ की चर्चा जरूर तेज हो गई है।
अब देखना होगा कि ये सिर्फ एक सियासी मुलाकात है या फिर 2027 के चुनाव से पहले अमरमणि त्रिपाठी ने वाकई अपना नया राजनीतिक ठिकाना तलाश लिया है।

