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13 राज्यों में कितने वोट कटे? खरगे ने जारी की लिस्ट, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

SIR प्रक्रिया पर खरगे ने उठाए सवाल, 13 राज्यों के आंकड़े जारी कर चुनाव आयोग से मांगा जवाब

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश के 13 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और कई राज्यों में सामने आई कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। खरगे ने आरोप लगाया कि मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब अलग हो सकता है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर विपक्ष के आंदोलन को दबाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगा।

खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल किया और पूछा कि उन्हें क्यों बचाया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग से जुड़े मामलों पर सवाल उठने के बीच विपक्ष के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

खरगे ने 13 राज्यों के आंकड़ों का किया जिक्र

उत्तर प्रदेश: खरगे के साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पीलीभीत में फॉर्म-8 में बदलाव से जुड़ी 10,470 कथित अनियमितताओं के मामले में एफआईआर दर्ज की गई और राज्यव्यापी ऑडिट शुरू हुआ। इसके अलावा एमएलसी मतदाता सूचियों में 158 प्रविष्टियों में सॉफ्टवेयर के कारण नाम संबंधी गलतियां सामने आने का दावा किया गया।

महाराष्ट्र: राज्य में SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.07 करोड़ नाम हटाए जाने का उल्लेख किया गया है। वहीं, एमएलसी सूचियों में कंप्यूटर और स्वचालित अनुवाद से जुड़ी त्रुटियों का भी मामला उठाया गया।

पश्चिम बंगाल: विधानसभा चुनावों के बाद मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की अपीलों के संबंध में दावा किया गया कि तय की गई अपीलों में से 93 प्रतिशत सफल रहीं।

राजस्थान: भारतीय निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों के बीच करीब 30 लाख विसंगतियां होने का दावा किया गया है।

गुजरात: SIR के बाद मतदाता सूची में 68.12 लाख नाम कम होने का जिक्र किया गया। इसके साथ ही नाम दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने की बात कही गई।

कर्नाटक: यहां फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए। सामान्य तौर पर इस फॉर्म के जरिए मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने पर आपत्ति दर्ज कराई जाती है। खरगे की ओर से साझा किए गए आंकड़ों में दावा किया गया कि चुनाव अधिकारियों ने 61,059 लोगों के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरे।

आंध्र प्रदेश: राज्य में 20,959 फॉर्म-7 आवेदनों में चुनाव अधिकारियों को आपत्ति दर्ज कराने वाले के रूप में नामित किए जाने का उल्लेख किया गया है।

ओडिशा: धामनगर में 3,000 से अधिक नाम हटाने के लिए आवेदन आने की बात कही गई। इन आवेदनों के दुरुपयोग को लेकर बूथ स्तर के अधिकारियों यानी BLOs की ओर से चिंता जताए जाने का दावा किया गया।

तेलंगाना: ड्राफ्ट मतदाता सूची से 73.39 लाख नाम हटाए जाने का आंकड़ा सामने रखा गया।

झारखंड: चतरा विधानसभा क्षेत्र में 4,790 फॉर्म-7 आवेदन आने का उल्लेख किया गया। दावा है कि ये आवेदन राज्य में कुल आवेदनों का लगभग 36 प्रतिशत थे।

हरियाणा: यहां 44.91 लाख सत्यापन नोटिस जारी किए जाने और 1 अक्टूबर तक 4.35 लाख सुनवाई लंबित रहने का जिक्र किया गया है।

दिल्ली: ड्राफ्ट मतदाता सूची से 47.5 लाख नाम हटाए जाने का दावा किया गया। साथ ही, मीडिया जांच के बाद फॉर्म-6 के निपटारे से जुड़े आंकड़ों में संशोधन किए जाने का उल्लेख किया गया।

गोवा: चुनाव आयोग के ECINet सिस्टम में रोलबैक सुविधा की कमी के कारण 97 पात्र मतदाताओं के नाम शुरुआत में बहाल नहीं हो पाने का मामला उठाया गया।

चुनाव आयोग की भूमिका पर कांग्रेस के सवाल

इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे।

खरगे ने स्पष्ट किया कि INDIA गठबंधन मतदान के अधिकार और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगा। अब इन आरोपों पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

नोट: राज्यों से जुड़े आंकड़े और आरोप खरगे की ओर से साझा किए गए विवरण पर आधारित हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित आधिकारिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

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