सीजेपी के संस्थापक सदस्यों सौरव दास, अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सीजेपी के संस्थापक कोई संत नहीं हैं और संभव है कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हों। हालांकि, वांगचुक के मुताबिक राजनीति में आने की इच्छा रखना अपने आप में गलत नहीं है।
प्रखर गुप्ता के साथ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान वांगचुक ने कहा कि उन्होंने सीजेपी के संस्थापक सदस्यों को काफी करीब से देखा है और उनके आकलन के आधार पर उन्हें लगता है कि उनमें राजनीतिक महत्वाकांक्षा जरूर है। उन्होंने साफ किया कि यह उनका निजी आकलन है और संस्थापकों ने खुद उनसे ऐसी कोई बात नहीं कही है।
वांगचुक ने कहा कि वह चाहते हैं कि अधिक से अधिक युवा राजनीति में आएं, राजनीतिक दलों से जुड़ें या जरूरत पड़ने पर अपनी अलग पार्टी बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति का पहले किसी राजनीतिक दल के साथ काम करना गलत नहीं है।
अभिजीत दिपके को लेकर उन्होंने बताया कि जब वह छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे, तब कुछ लोगों ने उन्हें बताया था कि दिपके पहले आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े रहे हैं। लेकिन वांगचुक ने इस बात को ज्यादा महत्व नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग को लेकर करीब दो महीने तक चले विरोध प्रदर्शन में काम किया था। वांगचुक ने कहा कि भविष्य में इन लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हो सकती हैं, लेकिन फिलहाल जरूरी है कि सीजेपी के मंच का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए न हो।

