गुरुर ब्लॉक की नगर पंचायत पलारी में उपाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सियासी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस के पास 15 में से 10 पार्षदों का साफ बहुमत है। फिर भी भारतीय जनता पार्टी उपाध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है और इसी जोर का नतीजा – निर्वाचन की तारीख ही बदल दी गई। पलारी सहित जिले में तारीख बदलाव की खासी चर्चा है।
दरअसल, उपाध्यक्ष चुनाव की तारीख पहले 18 जून तय थी। पर अचानक जिला प्रशासन द्वारा बिना किसी ठोस वजह के तारीख को बढ़ाकर 21 जून कर दिया गया। बस, फिर क्या था, कांग्रेस ने सीधे भाजपा और जिला प्रशासन पर हमला बोल दिया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि ये कोई संयोग नहीं, भाजपा की सोची-समझी साजिश है। बहुमत हमारे पास है, तो भाजपा को हर हाल में 3 दिन चाहिए। किसलिए? ताकि जोड़-तोड़ कर सके। पार्षदों को खरीद-फरोख्त का वक्त मिल जाए। ये लोकतंत्र नहीं, हॉर्स ट्रेडिंग की तैयारी है।
*जिला प्रशासन बना भाजपा का मोहरा*
कांग्रेस का सबसे बड़ा हमला जिला प्रशासन पर है। नेताओं ने कहा कि बिना किसी प्राकृतिक आपदा, बिना किसी तकनीकी खराबी के चुनाव की तारीख कैसे टल सकती है? साफ है कि भाजपा के दबाव में जिला प्रशासन काम कर रहा है। भाजपा चुनाव में हार गई है इसलिए बौखलाहट दिख रही है। भाजपा को बहुमत नहीं चाहिए, उसे बस 3 दिन का वक्त चाहिए पार्षदों को तोड़ने के लिए। परिषद में 10 पार्षद कांग्रेस के हैं, 5 भाजपा के हैं। आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में हैं। फिर भी भाजपा उपाध्यक्ष पद पर काबिज होने की सोच रही है। ये दावा नैतिकता का नहीं, नोट की ताकत का है। तारीख बढ़ाना इसी ‘ऑपरेशन लोटस’ का पहला कदम है।
*‘लोकतंत्र को कुचलने की साजिश’*
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जनता सब देख रही है। अध्यक्ष पद की हार से बौखलाई भाजपा अब उपाध्यक्ष की कुर्सी छीनने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। पहले जनता ने नकारा, अब पार्षदों को खरीदने की कोशिश। कांग्रेस ने चेतावनी दी है – “अगर हॉर्स ट्रेडिंग की गई, तो हम सड़क पर उतरेंगे। पलारी की जनता को लोकतंत्र की हत्या नहीं देखने देंगे। इधर 21 जून का दिन पलारी के लिए परीक्षा है। क्या बहुमत जीतेगा या नोट की ताकत? क्या प्रशासन निष्पक्ष रहेगा या भाजपा का एजेंट बनकर काम करेगा? फिलहाल पलारी में सियासी पारा सातवें आसमान पर है। 3 दिन में भाजपा क्या ‘गुल’ खिलाती है। इस पर सबकी नजर है
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