*अरकार समिति में धान खरीदी पर बवाल: ‘बिना काम भुगतान’ का आरोप, प्रबंधक बोले- ‘बेटे ने किया काम, पिता को मिला पैसा’*
*गुरूर/बालोद:*
सुशासन तिहार 2026 में सेवा सहकारी समिति अरकार की धान खरीदी में गड़बड़ी का मामला गरमा गया है। शिकायत के बाद हुई जांच में 27000 रुपये के नियम विरुद्ध भुगतान का खुलासा हुआ है। नोडल अधिकारी ने समिति प्रभारी से पूरी राशि की वसूली की अनुशंसा की है। वहीं समिति प्रबंधक किसी भी काम में गड़बड़ी नहीं होने की बात कह रहा है।
दरअसल, ग्राम अरकार निवासी देवसिंह साहू ने सुशासन तिहार के जरिए शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि धान खरीदी वर्ष 2025-26 में फड़ मुंशी के नाम पर राशि निकालकर गबन किया गया। साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रभारी प्रबंधक खोमूलाल साहू को हटाने की मांग भी की गई थी।
*जांच में क्या निकला?*
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग के नोडल कार्यालय ने मामले की जांच की। रिपोर्ट में बताया गया कि समिति की 2 नवंबर 2025 की बैठक के प्रस्ताव क्रमांक-02 के तहत धान खरीदी के लिए कर्मचारी रखे गए थे। इसमें डेमन लाल साहू को 9 हजार रुपये प्रतिमाह पर मुख्य लिपिक यानी फड़ मुंशी नियुक्त किया गया था।
जांच में सामने आया कि डेमन लाल साहू ने खरीदी अवधि में एक दिन भी काम नहीं किया। इसके बावजूद उनके नाम से नवंबर 2025 में 9000 रुपये, दिसंबर 2025 में 9,000 रुपये और जनवरी 2026 में 9,000 रुपये, कुल 27000 रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसे जांच अधिकारियों ने नियम विरुद्ध माना है।
*कार्रवाई की सिफारिश*
नोडल अधिकारी ने उप पंजीयक, सहकारिता बालोद को पत्र भेजा है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के सेवा नियम 2018 के तहत कार्रवाई के लिए कहा गया है। साथ ही प्रबंधक के स्थानांतरण की मांग पर भी नियमानुसार प्रक्रिया शुरू हो गई है।
*प्रबंधक बोले ‘गबन नहीं, काम हुआ है’*
समिति प्रबंधक खोमूलाल साहू ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, “कहीं कोई गलत नहीं हुआ। डेमन लाल के बेटे ने धान खरीदी में काम किया था। नियुक्ति पिता के नाम पर थी, इसलिए भुगतान पिता को नकद किया गया। इसकी जांच हो चुकी है। सभी ने लिखित बयान दिया है कि काम हुआ है। खोमूलाल साहू ने इसे छवि धूमिल करने का प्रयास बताया। कहा कि अगर तकनीकी रूप से रिकवरी बनती है तो राशि जमा कर देंगे।
*किसानों में नाराजगी*
मामले के खुलासे के बाद क्षेत्र में सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि धान खरीदी में पारदर्शिता नहीं बरती गई। किसानों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सरकारी राशि की वसूली की मांग की है। इस प्रकरण ने सहकारी समितियों में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब उप पंजीयक कार्यालय की कार्रवाई पर सबकी नजर है।
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