दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया है।
सत्य निकेतन की इमारत ढहने के मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय, एमसीडी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के सामने छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कुछ-कुछ समय के अंतराल पर ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें बाहर से आकर पढ़ाई करने वाले छात्र अपनी जान गंवा देते हैं। कभी आग लगने की घटना होती है, कभी जलभराव की वजह से परेशानी होती है और कभी जर्जर इमारतें हादसे का कारण बन जाती हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली नगर निगम और संबंधित प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वह दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और एमसीडी की ओर से पेश हो रहे हैं।
वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी और प्रशासनिक अधिकारियों को इस तरह के मामलों में ज्यादा गंभीर, व्यापक और सार्थक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
दरअसल, हादसे में ढही इमारत में दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रह रहे थे। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि दिल्ली विश्वविद्यालय के पास बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों को निजी पीजी और किराए के कमरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
इसी बीच सत्य निकेतन की उस पीजी बिल्डिंग से जुड़ा रेंट एग्रीमेंट भी सामने आया है, जिसने छात्रों की सुरक्षा और मकान मालिक की जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सामने आई जानकारी के मुताबिक, एग्रीमेंट में एक ऐसी शर्त का उल्लेख था, जिसमें परिसर में रहने वाले किरायेदारों के साथ किसी दुर्घटना, जोखिम या जनहानि की स्थिति में पीजी संचालक की जिम्मेदारी से इनकार किया गया था।
यानी हादसे की स्थिति में किरायेदार को किसी तरह का नुकसान होने या उसकी जान जाने पर पीजी प्रबंधन को जिम्मेदार नहीं ठहराने की बात एग्रीमेंट में दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
अब इस शर्त को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और क्या सिर्फ रेंट एग्रीमेंट में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेने से किसी भवन मालिक या पीजी संचालक की कानूनी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?
सत्य निकेतन हादसे में मध्य प्रदेश के दो छात्रों की मौत की जानकारी भी सामने आई है। इनमें कटनी के रहने वाले 18 वर्षीय अक्षत यादव और अर्पित शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक अक्षत यादव दिल्ली में रहकर PGDI कोर्स की पढ़ाई कर रहा था। हादसे के बाद उसकी मौत की खबर परिवार तक पहुंची तो कटनी में उसके घर में मातम छा गया। परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं।
बताया जा रहा है कि अक्षत का शव हादसे में बरामद किया गया पांचवां शव था। वहीं, अर्पित की मौत की भी पुष्टि हुई है।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस की टीम भी अस्पताल पहुंची और मृतकों की पहचान समेत जरूरी कानूनी कार्रवाई में जुट गई।
सत्य निकेतन का यह हादसा एक बार फिर दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था, पीजी संचालकों की जवाबदेही और जर्जर इमारतों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

