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आजमगढ़: आवारा पशु के हमले में किसान की दर्दनाक मौत, परिजनों से मिले सोशलिस्ट किसान सभा के नेता, 50 लाख मुआवजे की मांग

मेंहनगर, आजमगढ़ (23 मार्च 2026)। आजमगढ़ जिले के मेंहनगर थाना क्षेत्र के सेरा गांव में आवारा पशु के हमले में एक किसान की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतक किसान की पहचान 55 वर्षीय लालचंद गौड़ के रूप में हुई है, जो अपने खेत में काम कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही सोशलिस्ट किसान सभा का प्रतिनिधि मंडल गांव पहुंचा और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।

प्रतिनिधि मंडल में सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव, मेंहनगर प्रभारी हीरालाल यादव और समाजसेवी राजेश लाल यादव शामिल रहे। नेताओं ने मृतक के परिजनों से बातचीत कर घटना की जानकारी ली और हर संभव मदद का भरोसा दिया।

जानकारी के अनुसार, लालचंद गौड़ अपने खेत में सरसों की कटाई कर रहे थे। इसी दौरान एक उग्र आवारा पशु ने अचानक उन पर हमला कर दिया। पशु ने उन्हें पटक-पटक कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने उन्हें बचाने की कोशिश की और तत्काल अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है।

सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव ने इस घटना के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आवारा पशुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे किसानों की जान जोखिम में पड़ गई है। खेतों और सड़कों पर हर समय खतरा बना रहता है, लेकिन शासन-प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

उन्होंने मांग की कि मृतक किसान के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रशासन यह दावा करता है कि क्षेत्र में कोई आवारा पशु नहीं है, तो ऐसी घटनाओं के लिए संबंधित अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल करते हुए कहा कि आखिर अब मृतक के परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा। उन्होंने प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद भी अब तक हमलावर पशु को पकड़ा नहीं गया है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

मृतक लालचंद गौड़ अपने पीछे बड़ा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें चार बेटे और चार बेटियां शामिल हैं। परिवार के सामने अब आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों और किसान संगठनों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई और ठोस समाधान की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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