संवाददाता- दीपक देवदास
मुआवजे से मुकरा राइस मिल प्रबंधन, परिजनों ने दी धरने की चेतावनी
– मृतका का पति लेखराम बोला- कंपनी मालिक ने मेरे साथ छल किया
– जहां साइन करने बोला वहां करता गया, अब कह रहे कुछ नहीं देंगे
– पुलिस और प्रशासन भी हादसे के दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे
गुरुर (बालोद)।
बालोद जिले ग्राम कुम्हारखान स्थित मोहन फूड्स राइस मिल 1 मार्च को हुए हादसे के बाद कंपनी ने मृतक परिवार को मुआवजा देने की बात कही थी। मामला रफा-दफा होने के बाद अब कंपनी ने भी मुंह फेर लिया है। कंपनी मालिक पर मृतक के परिवार ने छल करने का आरोप लगा रहा है। मृतक का परिवार अब कंपनी के सामने धरने देने की बात कह रहा है। वहीं घटना के बाद कंपनी के खिलाफ जनाक्रोश भी पनप रहा है। जिला प्रशासन पर कोई ठोस कार्रवाई न करने के आरोप लग रहे हैं।
दरअसल, ग्राम कुम्हारखान स्थित मोहन फूड्स राइस मिल में 35 वर्षीय मजदूर केशर बाई ठाकुर की मौत 1 मार्च को जिस तरह हुई, उसने रूह तक कंपा देने वाली थी। दो साल से मेहनत कर रही एक महिला मजदूर रोज की तरह काम पर पहुंचती है और फिर चावल के टैंक में जिंदा दफन हो जाती है। यह दुर्घटना नहीं, यह एक खामोश हत्या जैसी लगती है। जांच में मिल मालिक ने बड़ी आसानी से जिम्मेदारी मैनेजर शत्रुघन मंडावी पर डाल दी और पुलिस ने भी उसी आधार पर केस दर्ज कर दिया। आखिर क्या सिर्फ मैनेजर ही दोषी है? मिल संचालक पर कोई अपराध नहीं बनता।
कंपनी मालिक ने मेरे साथ धोखा किया
लेखराम ठाकुर ग्राम पंचायत कुम्हारखान ने कहा कि कंपनी के लोगों ने जैसा कहा मैंने वैसा किया। जहां साइन करने बोले कर दिया। अब अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। साढ़े 11 लाख रुपये मिलना था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं दिए। पत्नी की मौत हो गई। बच्चे और मां अब मेरे सहारे हैं। अगर मुझे, मेरे बच्चे या मेरी मां को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी राइस मिल संचालक जागेंद्र किरी होगी। मेरी पत्नी की मौत हत्या है। वहीं लेखराम ठाकुर की मां नीरा ठाकुर ने कहा कि पहले कंपनी के लोग आए थे। बोले थे बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएंगे। केशर बाई ठाकुर की मौत के बाद उसकी सैलरी हर महीने घर आती रहेगी। अब कह रहे हैं कुछ नहीं देंगे। कंपनी मालिक से जवाब मांगने जाऊंगी।
घटना के 39 दिन बाद एफआईआर क्यों?
ग्राम कुम्हारखान स्थित मोहन फूड्स राइस मिल की घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलती है। जहां मजदूरों से काम तो लिया जाता है, लेकिन उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है। अगर आज भी इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और केशर बाई इसी तरह चुपचाप मौत के मुंह में धकेल दी जाएगी। दोषियों को बचाने के लिए पुलिस ने घटना के 39 दिन बाद एफआईआर किया, वह भी सवालों घेरे में है।
मैनेजर पर ठिकरा, मालिक को बचा रहे
जांच के दौरान राइस मिल संचालक जागेंद्र किरी से पूछताछ की गई। उन्होंने पुलिस को बताया कि मिल की देखरेख, सुरक्षा और संचालन की पूरी जिम्मेदारी मैनेजर शत्रुघन मंडावी की है। इसके समर्थन में नियुक्ति पत्र भी प्रस्तुत किया। इस आधार पर पुरुर पुलिस ने मैनेजर शत्रुघन मंडावी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। अब पुलिस सिर्फ जांच की बात कहकर खानापूर्ति कर रही है। पुलिस और प्रशासन से जुड़े लोग कंपनी की गलतियों को छुपाने और बचाने में लगे हैं। कंपनी से फूल सेटिंग होने की चर्चा भी जमकर चल रही है।

