संवददाता – दीपक देवदास ,बालोद
– कई शिकायतें थानों और प्रशासन तक पहुंच चुका, जिले में दो प्रकरण में अपराध भी दर्ज हुआ था
– गुरूर ब्लॉक के पंचायत प्रतिनिधि भी हो रहे फर्जी पत्रकार को खिलाफ लामबंद
गुरूर-बालोद।
बालोद जिले सहित गुरूर ब्लाक में इन दिनों फर्जी पत्रकारों का आतंक बढ़ गया है। खुद को बड़ा पत्रकार बताकर ये लोग गांव-गांव घूम रहे हैं और सरकारी दफ्तरों से लेकर शराब भट्ठी तक में पहुंचकर कर्मचारियों व आम लोगों को डरा-धमकाकर उगाही कर रहे हैं। मामले की शिकायत अब कलेक्टर और एसडीएम तक पहुंच गई है। प्रशासनिक अफसरों का साफ कहना है कि कहीं भी कोई फर्जी पत्रकार उगाही करने आए तो तुरंत थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
शराब भट्ठी में पहुंचकर दे रहे धमकी
सबसे ज्यादा शिकायतें शराब भट्ठियों से आ रही हैं। गुरूर क्षेत्र के अरकार देशी-विदेशी शराब दुकानों के कर्मचारियों ने बताया कि 4-5 युवक खुद को यूट्यूब चैनल और पोर्टल का पत्रकार बताकर पहुंचते हैं। कैमरा और माइक दिखाकर कहते हैं कि “स्टॉक में गड़बड़ी है, ज्यादा शराब बेच रहे हो, ओवररेट की खबर चला देंगे”। वीडियो बनाने की धमकी देकर 5 से 10 हजार रुपये तक की मांग करते हैं। डर के मारे कुछ शराब दुकान के सेल्समैन पैसे दे भी चुके हैं। वहीं शराब खरीदकर जा रहे लोगों को थाने में बंद कराने की धमकी देकर 500 से एक हजार तक उगाही करते हैं।
क्षेत्र की ग्राम पंचायतें भी निशाने पर
फर्जी पत्रकारों का गिरोह अब ग्राम पंचायतों तक पहुंच गया है। क्षेत्र के सरपंच और सचिवों को निशाना बनाया जा रहा है। निर्माण कार्यों में कमी, हैंडपंप खराब, सफाई नहीं होने, अवैध मुरूम खनन, योजनाओं में गड़बड़ी जैसे मुद्दों पर वीडियो बनाकर कहते हैं कि “खबर वायरल कर देंगे, ऊपर तक शिकायत जाएगी”। इसके बाद सेटलमेंट के नाम पर 2 से 5 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। बालोद जिले के गुरूर ब्लाक की 10 से ज्यादा पंचायतों से ऐसी शिकायतें भी सामने आ चुकी है।
ऐसे करें फर्जी पत्रकारों की पहचान
1. प्रेस कार्ड नहीं: पूछने पर कोई मान्यता प्राप्त संस्थान का ID नहीं दिखाते। सिर्फ यूट्यूब चैनल का लोगो लगा कार्ड रखते हैं।
2. ब्लैकमेलिंग: कैमरा ऑन करके सीधे धमकी देते हैं – “पैसे दो नहीं तो अभी खबर चला दूंगा”।
3. रात में सक्रिय: ज्यादातर शराब भट्ठी और ढाबों पर शाम 7 बजे के बाद पहुंचते हैं।
4. स्थानीय नहीं: कई आरोपी दुर्ग, रायपुर और धमतरी से गाड़ी में आते हैं।
प्रशासन व पत्रकार संघ ने जारी की एडवाइजरी
बालोद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी एसडीएम और थानों को निर्देश दिए हैं। एसडीएम गुरूर ने बताया कि “कोई भी व्यक्ति अगर पत्रकार बनकर पैसा मांगता है तो वह पत्रकार नहीं, अपराधी है। RNI रजिस्टर्ड अखबार या सूचना विभाग से मान्यता प्राप्त पत्रकार कभी पैसे नहीं मांगते।” बालोद पत्रकार संघ भी फर्जी पत्रकारों पर कार्रवाई की मांग कर चुका है।
क्या करें आम लोग
1. ID मांगे: प्रेस कार्ड, आधार कार्ड और संस्थान का लेटर जरूर चेक करें।
2. वीडियो बनाएं: अगर कोई धमकाए तो चुपचाप उसका वीडियो बना लें।
3. 100 डायल करें: तुरंत पुलिस को सूचना दें। गुरूर थाना प्रभारी ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।
4. शिकायत दर्ज करें: डरें नहीं। ब्लैकमेलिंग IPC की धारा 384 के तहत अपराध है।
पत्रकार संगठनों में नाराजगी
गुरूर छत्तीसगढ जर्नलिस्ट यूनियन बालोद जिला के अध्यक्ष दीपक देवदास ने कहा कि “कुछ लोगों की वजह से पूरे पेशे को बदनाम किया जा रहा है। असली पत्रकार जनहित के मुद्दे उठाता है, उगाही नहीं करता।” उन्होंने मांग की है कि पुलिस ऐसे फर्जी लोगों पर सख्त कार्रवाई करे। प्रशासनिक अफसरों का साफ कहना है कि फर्जी पत्रकारों का खेल अब ज्यादा दिन नहीं चलेगा। गांव-गांव में मुनादी कराकर लोगों को जागरूक करने के लिए भी कहेंगे।

