संवाददाता || दीपक देवदास || बालोद
गुरूर। गुरूर ब्लॉक अंतर्गत सनौद सोसाइटी में चना खरीदी के दौरान कई समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे किसानों और समिति दोनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस वर्ष चना की पैदावार अच्छी हुई है, लेकिन व्यवस्थागत खामियों के कारण खरीदी की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
सबसे बड़ी समस्या बारदाने के छोटे साइज को लेकर सामने आई है। शासन द्वारा 40 किलो क्षमता वाले बोरे उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि तौल 50 किलो में किया जा रहा है। ऐसे में किसानों को बोरे में चना भरने और सिलाई करने में दिक्कत हो रही है। कई बार चना गिरने लगता है और सिलाई मशीन की सुई तक टूट जाती है। किसानों का कहना है कि कम से कम 60 किलो क्षमता वाला बारदाना उपलब्ध कराया जाए, तभी समस्या का समाधान संभव है।
वहीं चना खरीदी ग्रेडिंग पद्धति से की जा रही है, जिसके चलते किसानों को साफ और अच्छी गुणवत्ता का उत्पादन लाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा भंडारण के दौरान दीमक लगने की समस्या भी सामने आई है, जिससे बचाव के लिए पाउडर का उपयोग किया जा रहा है।
खरीदी के आंकड़ों की बात करें तो
सनौद में अब तक 1057 किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 180 किसान चना बेच चुके हैं। वर्तमान में करीब 2500 कट्टा चना उपलब्ध है, जबकि पिछले तीन दिनों में 4300 कट्टा चना की खरीदी की गई है।
इस बीच QR कोड सिस्टम और सर्वर की समस्या ने खरीदी और परिवहन दोनों को प्रभावित किया है। हर बोरे में QR कोड अनिवार्य होने के कारण बिना कोड के सिलाई और परिवहन नहीं हो पा रहा है। इससे गाड़ियां भी परिवहन के लिए नहीं जा पा रही हैं और पूरी प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।
किसानों के भुगतान की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है, हालांकि जानकारी के अनुसार भुगतान सोमवार से शुरू होने की संभावना है और करीब 4 लाख रुपये का भुगतान शेष है। वहीं ग्रेडिंग को लेकर 500 रुपये के लेनदेन की शिकायत भी सामने आई है।
सनौद सोसाइटी के प्राधिकृत अधिकारी नंद कुमार साहू ने बताया कि बारदाने की समस्या, QR कोड की कमी, सर्वर दिक्कत और परिवहन बाधा के कारण चना खरीदी प्रभावित हो रही है। छुट्टी के चलते भी खरीदी और परिवहन कार्य बाधित रहा है।
गौरतलब है कि गुरूर, बासिन, पलारी और फागुनदाह सोसाइटी में चना खरीदी की व्यवस्था की गई है और इसके लिए दो टीमें बनाई गई हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे किसी भी ब्लॉक या जिले के केंद्र में जाकर अपना चना बेच सकते हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अच्छी पैदावार के बावजूद व्यवस्थागत कमियां किसानों की मेहनत पर भारी पड़ रही हैं, जिसे दूर करना जरूरी है।

