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गुरुर, वन्यप्राणियों से जन-धन हानि पर मुआवजा राशि में लगातार बढ़ोतरी, शासन ने जारी किए संशोधित निर्देश

संवददाता – दीपक देबदास , बालोद 

गुरुर। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा हिंसक वन्यप्राणियों से होने वाली जनहानि, पशुहानि, फसल क्षति एवं मकान नुकसान पर दी जाने वाली क्षतिपूर्ति राशि में समय-समय पर वृद्धि करते हुए राहत प्रावधानों को और मजबूत किया गया है। गुरुर वन विभाग के रेंजर सीएस भंडारी ने बताया कि शासन द्वारा जारी विभिन्न आदेशों के माध्यम से वन्यप्राणियों से प्रभावित लोगों को त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
वन विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नया रायपुर द्वारा जारी आदेशों के अनुसार शेर, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, भेड़िया, जंगली सूअर, गौर, जंगली हाथी, मगरमच्छ, घड़ियाल, वन भैंसा एवं सियार जैसे हिंसक वन्यप्राणियों से होने वाली घटनाओं में सहायता राशि बढ़ाई गई है।
वर्ष 2019 में जारी आदेश के तहत वन्यप्राणियों द्वारा जनहानि अर्थात मृत्यु होने पर मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि 4 लाख रुपए से बढ़ाकर 6 लाख रुपए कर दी गई। यह प्रावधान 1 जून 2019 से प्रभावशील किया गया था। शासन ने इसे वन्यप्राणी प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत माना है।
इसके पूर्व वर्ष 2015 में जारी आदेश में स्थायी अपंगता की स्थिति में 2 लाख रुपए सहायता राशि निर्धारित की गई थी। वहीं जनघायल होने पर अधिकतम 59 हजार 100 रुपए तथा पशुहानि पर अधिकतम 30 हजार रुपए तक सहायता देने का प्रावधान किया गया था।
वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में किसानों की फसल हानि को भी शामिल किया गया है। शासन ने 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान होने पर भूमि की प्रकृति एवं फसल के अनुसार आर्थिक सहायता तय की है। असिंचित भूमि के लिए प्रति हेक्टेयर 6800 रुपए तथा सिंचित भूमि के लिए 13 हजार 500 रुपए सहायता राशि निर्धारित की गई है। बारहमासी फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपए तक सहायता का प्रावधान किया गया है।
फलदार वृक्षों की क्षति पर प्रति वृक्ष 750 रुपए तक सहायता तथा आम, संतरा एवं नींबू के बगीचों को नुकसान होने पर अधिकतम 35 हजार रुपए तक अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। पपीता, केला, अनार एवं अंगूर जैसी फसलों को नुकसान होने पर प्रति हेक्टेयर 13 हजार 500 रुपए सहायता दी जाएगी।
पशुहानि की स्थिति में भी शासन ने आर्थिक सहायता तय की है। दुधारू पशुओं एवं अन्य उत्पादक पशुओं के लिए अलग-अलग सहायता राशि निर्धारित की गई है। वहीं बैल, घोड़ा, ऊंट, भैंसा जैसे पशुओं की मृत्यु पर 25 हजार रुपए तक सहायता का प्रावधान रखा गया है।
इसी क्रम में वर्ष 2024 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने वन्यप्राणियों द्वारा मकान क्षति पर मिलने वाली मुआवजा राशि में भी संशोधन किया है। सामान्य क्षेत्रों में पक्का अथवा कच्चा मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर अधिकतम 1 लाख 20 हजार रुपए तथा पहाड़ी क्षेत्रों में 1 लाख 30 हजार रुपए तक सहायता राशि निर्धारित की गई है। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 6500 रुपए तथा कच्चे घरों के लिए 4000 रुपए सहायता राशि तय की गई है। झोपड़ी नष्ट होने पर 8000 रुपए तथा पशु बाड़े के नुकसान पर 3000 रुपए तक मुआवजा दिया जाएगा।
रेंजर सीएस भंडारी ने बताया कि शासन का उद्देश्य वन्यप्राणियों एवं मानवों के बीच बढ़ते संघर्ष से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाना है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वन्यप्राणियों से संबंधित किसी भी घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दें ताकि नियमानुसार त्वरित कार्रवाई एवं सहायता प्रदान की जा सके।

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