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भाजपा ने सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर किया मंथन, संगठनात्मक बदलाव के संकेत तेज

भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सबको साधेगी। बीते दो दिन से भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े के राजधानी आगमन के दौरान ताबड़तोड़ बैठकों में तय हुआ कि सामाजिक ताना-बाना दुरुस्त करने के लिए छूटी जातियों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। जिन वर्गों की हिस्सेदारी कम है, उसे बढ़ाया जाएगा। पदाधिकारियों को सरकार, संगठन और आयोग-निगम, बोर्डों में समायोजित किया जाएगा। बीते दो दिन से विनोद तावड़े के आगमन के बाद भाजपा में चल रही गहमागहमी सोमवार को समाप्त हो गई। विनोद तावड़े दिल्ली रवाना हो गए, जहां पार्टी हाईकमान को अपनी रिपोर्ट सौपेंगे। इसके आधार पर ही समायोजित होने वाले पदाधिकारियों के नाम पर मुहर लगाई जाएगी। दरअसल, बैठकों में हुए मंथन में सूबे के सामाजिक समीकरणों को लेकर चिंता उभरी, जिसके बाद विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने से पहले सबको साधने का फैसला किया गया है। पार्टी इसका विस्तृत रोडमैप तैयार करने में जुटी है। विनोद तावड़े का दो दिवसीय लखनऊ दौरा भी इसी कवायद का हिस्सा था। तावड़े ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई अन्य नेताओं से मुलाकात की, इस दौरान सरकार और संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। योगी समेत वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के बाद प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट फिर तेज हो गई। तावड़े ने पूर्व डिप्टी सीएम एवं राज्यसभा सांसद डा. दिनेश शर्मा, वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना से भी मुलाकात कर सुझाव और फीडबैक लिया। वहीं रविवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक के अलावा तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों भूपेंद्र चौधरी, सूर्यप्रताप शाही और रमापति राम त्रिपाठी, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी और पूर्व मंत्री डा. महेंद्र सिंह से मुलाकात की थी।

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