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केरल के राज्यपाल के खाने पर छिड़ा विवाद! BJP भड़की, कांग्रेस को लेकर दिया तीखा बयान

केरल के राज्यपाल के खाने पर सियासी घमासान! BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर बोले- कांग्रेस ने खोया मानसिक संतुलन

केरल के राज्यपाल के खान-पान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बहस में बदल गया है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्यपाल के खान-पान को उनकी व्यक्तिगत पसंद बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी संस्कृति और पसंद के अनुसार भोजन चुनने का अधिकार है।

मीडिया से बातचीत के दौरान राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी अपना मानसिक संतुलन खो चुकी है और गैरजरूरी मुद्दों पर बहस कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राज्य के युवाओं की बेरोजगारी और दवाओं की कमी जैसी गंभीर समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय राज्यपाल के खान-पान को मुद्दा बना रही है।

बेरोजगारी और दवाओं की कमी पर BJP का सवाल

राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि केरल में ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन पर राजनीतिक दलों को चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि बेरोजगारी दूर करने और जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं। उनके मुताबिक, राज्य के युवाओं और दवाओं की कमी से परेशान परिवारों की समस्याओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

BJP प्रदेश अध्यक्ष ने राज्यपाल के भोजन संबंधी फैसले का बचाव करते हुए कहा कि राजभवन में रहने वाले राज्यपाल को अपनी निजी और सांस्कृतिक पसंद के अनुसार भोजन चुनने का अधिकार है।

क्या है राज्यपाल के खान-पान का पूरा विवाद?

दरअसल, केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ लेने के बाद ओम प्रकाश माथुर को लेकर खबरें सामने आई थीं कि वह पूरी तरह शाकाहारी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने मुख्य लोक भवन की रसोई में मांसाहारी भोजन नहीं बनाने के निर्देश दिए थे। इस खबर के सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।

विवाद बढ़ने पर लोक भवन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन तक सीमित थी। अन्य कर्मचारियों को अपनी पसंद का भोजन लाने और खाने की स्वतंत्रता थी।

कांग्रेस और CPI(M) ने उठाए सवाल

राज्यपाल के भोजन संबंधी निर्देशों की कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के नेताओं ने आलोचना की। उनका तर्क था कि खान-पान व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता से जुड़ा विषय है। इस मामले में उठाए गए सवालों ने राज्यपाल की निजी पसंद और सरकारी संस्थानों में भोजन संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

फिलहाल, राज्यपाल के खान-पान से शुरू हुआ यह विवाद BJP और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है। जहां BJP इसे व्यक्तिगत पसंद का मामला बता रही है, वहीं कांग्रेस और CPI(M) ने इस तरह के निर्देशों पर सवाल उठाए हैं।

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