राहुल गांधी ने पंजाब में चुनावी अभियान के लिए संगरूर को ही क्यों चुना? जानिए इसके पीछे की पूरी सियासी रणनीति
कांग्रेस नेता राहुल गांधी 4 नवंबर को पंजाब के संगरूर में इंसाफ रैली करने जा रहे हैं। इस रैली के साथ कांग्रेस ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। लेकिन सवाल यह है कि राहुल गांधी ने चुनावी अभियान के आगाज के लिए संगरूर को ही क्यों चुना? इसके पीछे मालवा क्षेत्र का चुनावी गणित और पंजाब में नशे की समस्या को लेकर चल रही राजनीतिक बहस अहम मानी जा रही है।
दरअसल, कांग्रेस ने अपने मिशन 2027 की शुरुआत पंजाब के मालवा क्षेत्र से करने का फैसला किया है। मालवा राज्य का सबसे बड़ा चुनावी क्षेत्र है। यहां विधानसभा की कुल 117 सीटों में से 69 सीटें आती हैं। ऐसे में इस इलाके का चुनावी महत्व सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए काफी अहम है।
संगरूर रैली का क्या है मकसद?
राहुल गांधी की इंसाफ रैली के जरिए कांग्रेस मालवा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज करना चाहती है। पार्टी का उद्देश्य इस इलाके के कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करना है। संगरूर को केंद्र बनाकर कांग्रेस मालवा की अलग-अलग विधानसभा सीटों तक अपना संदेश पहुंचाने की तैयारी में है।
संगरूर ही क्यों बना रैली का केंद्र?
संगरूर इन दिनों नशे की समस्या और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों के कारण भी चर्चा में है। दिरबा के तूर बंजारा गांव के रहने वाले गुलजार सिंह की मौत का मामला राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
बताया जाता है कि गुलजार सिंह ने पहले सार्वजनिक रूप से पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से अपने गांव में नशे की उपलब्धता और अपने बेटे की लत को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद उनकी मौत की परिस्थितियों और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के साथ कथित व्यवहार को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए।
इस मामले को लेकर कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी और अन्य संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन भी किए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार का पक्ष और मामले की जांच से जुड़े तथ्य अलग से देखना जरूरी है।
पंजाब की सत्ता की चाबी मालवा के पास
पंजाब में तीन प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र हैं। इनमें मालवा, माझा और दोआबा शामिल हैं। विधानसभा सीटों का बंटवारा इस प्रकार है:
- मालवा – 69 सीटें
- माझा – 25 सीटें
- दोआबा – 23 सीटें
- कुल – 117 सीटें
यानी राज्य की करीब 59 प्रतिशत विधानसभा सीटें अकेले मालवा क्षेत्र में आती हैं। यही वजह है कि पंजाब में सरकार बनाने की कोशिश कर रही पार्टियां इस क्षेत्र को खास महत्व देती हैं।
मालवा का पंजाब की राजनीति में पुराना प्रभाव
मालवा को पंजाब की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इस क्षेत्र में संगरूर, बठिंडा, पटियाला, लुधियाना, मानसा, फरीदकोट, मोगा और फिरोजपुर जैसे प्रमुख जिले शामिल हैं। पिछले कई दशकों में राज्य की राजनीति और मुख्यमंत्री पद को लेकर भी इस क्षेत्र की अहम भूमिका रही है।
ऐसे में राहुल गांधी की संगरूर रैली को केवल एक जनसभा के तौर पर नहीं, बल्कि कांग्रेस के 2027 चुनावी अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। अब इस रैली में राहुल गांधी किन मुद्दों को उठाते हैं और पंजाब की जनता को क्या संदेश देते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
