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गुरुर: पथराटोला में प्रस्तावित विज्ञान केंद्र के निर्माण पर रोक लगाने मुख्यमंत्री से राकेश यादव ने की मांग

करीब 5 करोड़ की परियोजना की स्वतंत्र जांच कराने की मांग, खनन प्रभावित गांवों में पेयजल, सड़क, नाली और रोजगार को प्राथमिकता देने पर दिया जोर

गुरुर।बालोद जिले के डौंडी विकासखंड के ग्राम पथराटोला में लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित विज्ञान केंद्र के निर्माण को लेकर राजनीतिक एवं प्रशासनिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। संजारी-बालोद विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी, भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने इस परियोजना की आवश्यकता, लागत, वित्तपोषण, स्वीकृति प्रक्रिया और जनोपयोगिता की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में 16 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
राकेश कुमार यादव ने अपने पत्र में कहा है कि डौंडी विकासखंड आदिवासी बहुल एवं खनन प्रभावित क्षेत्र है। यहां के अनेक ग्रामीण परिवार सुरक्षित पेयजल, लाल पानी की समस्या के समाधान, सड़क, नाली, स्वच्छता, रोजगार और आजीविका जैसी बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। ऐसे में किसी बड़ी निर्माण परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों और जनता को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ का निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिए।
विज्ञान केंद्र की लागत और वित्तपोषण की जांच की मांग
राकेश यादव ने प्रस्तावित विज्ञान केंद्र की अनुमानित लागत लगभग पांच करोड़ रुपये बताए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि परियोजना की वास्तविक लागत, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति तथा वित्तपोषण के स्रोत की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि इस परियोजना में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ/डीएमएफटी) की राशि का उपयोग किया जा रहा है अथवा किसी अन्य मद या योजना से धन उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि परियोजना में डीएमएफ निधि का उपयोग प्रस्तावित है, तो यह जांच की जानी चाहिए कि राशि का उपयोग निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों की मूलभूत आवश्यकताओं की तुलना में इस परियोजना को प्राथमिकता देने का क्या औचित्य है।
उन्होंने परियोजना के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर), लागत अनुमान, चयन प्रक्रिया, निविदा, कार्यादेश और स्वीकृति से संबंधित दस्तावेजों की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
लाल पानी की समस्या और सुरक्षित पेयजल को बताया प्राथमिक आवश्यकता
पत्र में डौंडी क्षेत्र के कुछ गांवों में लाल रंग के पानी की समस्या का उल्लेख करते हुए प्रभावित जल स्रोतों और पेयजल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की गई है। यादव ने कहा कि पानी की गुणवत्ता और उसके लाल रंग के संभावित कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों से जांच कराई जानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
उन्होंने मांग की कि जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित गांवों में वैकल्पिक जल स्रोत, आवश्यक जल शोधन व्यवस्था और समस्या के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए। उनका कहना है कि सुरक्षित पेयजल नागरिकों की बुनियादी जरूरत है और इसके समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सड़क, नाली और बुनियादी सुविधाओं का हो गांववार सर्वेक्षण
राकेश यादव ने डौंडी विकासखंड के खनन प्रभावित एवं आदिवासी गांवों में सड़कों, नालियों, जल निकासी, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति का गांववार सर्वेक्षण कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि जिन गांवों में सड़कें खराब हैं, नालियों का अभाव है या जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है, वहां जरूरत के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकता तय की जानी चाहिए। विकास योजनाओं का चयन स्थानीय समस्याओं की गंभीरता और ग्रामीणों को मिलने वाले वास्तविक लाभ के आधार पर होना चाहिए, ताकि खनन प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं की अनदेखी न हो।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर जरूरी
पत्र में स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। यादव ने कौशल विकास, स्वरोजगार, कृषि आधारित गतिविधियों और अन्य रोजगारोन्मुख योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विज्ञान केंद्र से विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों को मिलने वाले प्रत्यक्ष एवं दीर्घकालीन लाभ का वस्तुनिष्ठ आकलन किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि उपलब्ध संसाधनों से क्षेत्र की पेयजल, सड़क, नाली और रोजगार संबंधी समस्याओं का समाधान किस प्रकार अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
अधिकारियों की भूमिका और चयन प्रक्रिया की जांच की मांग
राकेश यादव ने परियोजना के चयन, स्वीकृति और कार्य आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में संभावित पक्षपात, निजी हितों और हितों के टकराव की आशंका से जुड़े तथ्यों की जांच कराने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि परियोजना की लागत, वित्तपोषण, स्वीकृति प्रक्रिया और कार्य आवंटन में निर्धारित नियमों का पालन हुआ है या नहीं, इसकी जांच दस्तावेजों के आधार पर की जानी चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, पक्षपात, अनुचित लाभ या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य बिना जांच किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
विज्ञान केंद्र के संचालन और रखरखाव पर भी उठाए सवाल
यादव ने विज्ञान केंद्र के निर्माण के बाद उसके नियमित संचालन और रखरखाव की व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना की उपयोगिता केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होती। उसके संचालन, बिजली, वैज्ञानिक उपकरणों, कर्मचारियों और रखरखाव पर भी नियमित खर्च होता है।
इसलिए परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि केंद्र का संचालन कौन करेगा, उसके लिए प्रतिवर्ष कितनी राशि की आवश्यकता होगी और यह राशि किस मद से उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही स्थानीय विद्यार्थियों एवं युवाओं को मिलने वाले लाभ और केंद्र के प्रभावी संचालन की व्यावहारिक योजना का भी आकलन किया जाना चाहिए।
जांच पूरी होने तक निर्माण रोकने की मांग
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में राकेश कुमार यादव ने प्रमुख रूप से मांग की है कि पथराटोला में प्रस्तावित विज्ञान केंद्र के निर्माण कार्य पर जांच पूरी होने तक रोक लगाने के निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने परियोजना से संबंधित आगे की धनराशि जारी करने, नए कार्यादेश देने और अन्य वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्रवाई को नियमानुसार स्थगित रखने के संबंध में भी आवश्यक निर्णय लेने का अनुरोध किया है।
इसके साथ ही उन्होंने डौंडी विकासखंड के खनन प्रभावित आदिवासी गांवों की मूलभूत सुविधाओं का सर्वेक्षण कराकर प्राथमिकता सूची तैयार करने, सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, सड़कों एवं नालियों का विकास करने तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका संबंधी योजनाओं को प्राथमिकता देने की मांग की है।
उन्होंने शिकायत पर की गई कार्रवाई, जांच की समयसीमा और अंतिम निर्णय से उन्हें लिखित रूप में अवगत कराने का भी अनुरोध किया है।
राकेश कुमार यादव का कहना है कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल भवनों का निर्माण नहीं, बल्कि आम लोगों को सुरक्षित पेयजल, बेहतर सड़क, आवश्यक नागरिक सुविधाएं, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस मामले में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रस्तावित परियोजना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और खनन प्रभावित क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।

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