गुरुर में जमीन विवाद: शिक्षक पर दलाली के आरोप, रास्ता बंद होने से 20 खरीदार परेशान

यशवंत विश्वकर्मा गुरुर

पुलिस आरक्षक मनोज साहू भी परेशान, बोले- शिक्षक ने ही दिखाया था रास्ता; रास्ता खुलवाने के नाम पर पैसे मांगने की चर्चा

गुरुर। नगर पंचायत गुरुर के वार्ड क्रमांक 14 में जमीन खरीदने के बाद आवागमन का रास्ता नहीं मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। करीब 20 जमीन खरीदार इस समस्या से परेशान हैं। इनमें पुलिस विभाग में पदस्थ आरक्षक मनोज कुमार साहू भी शामिल हैं। खरीदारों का आरोप है कि जमीन खरीदते समय उन्हें जिस रास्ते से आवागमन का भरोसा दिलाया गया था, वर्तमान में वहां नगर पंचायत का मणिकंचन केंद्र और जनपद पंचायत की बाउंड्रीवाल होने के कारण उनकी जमीन तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं बचा है। इस मामले में कनेरी स्थित शासकीय हाई स्कूल में पदस्थ शिक्षक मनहरण सिन्हा और जमीन दलाल केशव देवांगन की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

पुलिस आरक्षक भी परेशान, शिक्षक पर रास्ता दिखाने का आरोप

जमीन खरीदार आरक्षक मनोज कुमार साहू ने बताया कि जमीन खरीदने के दौरान शिक्षक मनहरण सिन्हा ने ही उन्हें रास्ता दिखाया था। उस समय रास्ता होने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन अब उसी स्थान पर नगर पंचायत का मणिकंचन केंद्र और जनपद पंचायत की बाउंड्रीवाल निर्मित है। मनोज साहू का कहना है कि जिस स्थान को रास्ता बताया गया था, वह नगर पंचायत की जमीन है, जबकि बाजू की जमीन जनपद पंचायत के लिए आरक्षित बताई जा रही है। वहां बाउंड्रीवाल बन जाने से उनकी जमीन तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं रह गया है।

उन्होंने बताया कि करीब 20 खरीदार इस समस्या के समाधान के लिए लगातार नगर पंचायत के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है। खरीदारों का आरोप है कि उन्हें बार-बार कार्यालय बुलाकर टरकाया जा रहा है। रास्ता खुलवाने के नाम पर पैसों की मांग किए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। खरीदारों ने जमीन की खरीद-बिक्री में भूमिका निभाने वाले लोगों की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

शिक्षक पर जमीन दिखाने और दलाली कराने के आरोप

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, शिक्षक मनहरण सिन्हा स्कूल समय के बाद जमीन दिखाने और खरीदारों से संपर्क कराने का काम करते थे। आरोप है कि उन्होंने शिक्षक होने का परिचय देकर परिचितों का भरोसा जीता और जमीन दलाल केशव देवांगन के माध्यम से खरीद-बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ी। खरीदारों का कहना है कि जमीन खरीदते समय रास्ते को लेकर जो जानकारी दी गई थी, वास्तविक स्थिति उससे अलग निकली।

स्थानीय स्तर पर शिक्षक के विरुद्ध पूर्व में भी जमीन संबंधी गतिविधियों को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायत किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, पूर्व शिकायत और उस पर हुई विभागीय कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शिक्षक मनहरण सिन्हा ने आरोपों पर दी सफाई

वहीं शिक्षक मनहरण सिन्हा ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि मनोज साहू जमीन खरीदने के संबंध में उनके घर पहुंचे थे। वार्ड क्रमांक 14 स्थित जमीन के मामले में उन्होंने केवल गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। उक्त जमीन मनोज साहू ने किस उद्देश्य से खरीदी है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। शिक्षक के इस बयान के बाद मामले में खरीदारों के आरोप और शिक्षक का पक्ष दोनों सामने आ गए हैं।

एक शिक्षक समाज का आदर्श होता है : डोमेन्द्र कुमार भूआर्य

इस मामले में गुरुर के सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (एबीओ) डोमेन्द्र कुमार भूआर्य ने कहा कि एक शिक्षक जमीन की दलाली नहीं कर सकता, यहां तक कि वह ट्यूशन भी नहीं पढ़ा सकता। शिक्षक समाज का आदर्श होता है और उससे समाज को बेहतर आचरण एवं जिम्मेदारी की अपेक्षा रहती है। उनके इस बयान के बाद शिक्षक की भूमिका को लेकर शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

दस्तावेजों और रास्ते की वैधानिक स्थिति की जांच जरूरी

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जमीन की रजिस्ट्री के समय संबंधित भूखंडों तक पहुंचने के लिए वैध रास्ता उपलब्ध था या नहीं? जमीन का नक्शा, खसरा, रजिस्ट्री दस्तावेज, नगर पंचायत की भूमि और जनपद पंचायत के लिए आरक्षित भूमि की वास्तविक स्थिति की जांच आवश्यक है। साथ ही मणिकंचन केंद्र के निर्माण और जनपद पंचायत की बाउंड्रीवाल से रास्ता बाधित होने के आरोपों की भी राजस्व विभाग से जांच कराई जानी चाहिए।

खरीदारों की मांग है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान निकाले तथा यदि जमीन की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी या अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि करीब 20 खरीदारों को राहत दिलाने के लिए प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है।

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