
कनेरी स्कूल में पदस्थ शिक्षक की भूमिका पर उठे सवाल, पहले भी शिक्षा विभाग में शिकायत होने का दावा; मणिकंचन केंद्र और जनपद पंचायत की बाउंड्रीवाल के बीच फंसे जमीन खरीदार
गुरुर। बालोद जिले के नगर पंचायत गुरुर में जमीन खरीदने के बाद रास्ता नहीं मिलने का मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक 14 में जमीन खरीदने वाले करीब 20 खरीदारों को आवागमन का रास्ता नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खरीदारों का आरोप है कि जमीन दिखाने के दौरान जिस रास्ते का भरोसा दिलाया गया था, वहां अब नगर पंचायत का मणिकंचन केंद्र और जनपद पंचायत की बाउंड्रीवाल होने के कारण उनकी जमीन तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। इस मामले में गुरुर ब्लॉक के कनेरी स्थित शासकीय हाई स्कूल में पदस्थ शिक्षक मनहरण सिन्हा की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिक्षक पर जमीन दिखाने और दलाली करने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, शिक्षक मनहरण सिन्हा स्कूल के समय के बाद जमीन दिखाने और खरीदारों से संपर्क कराने का काम करते थे। आरोप है कि उन्होंने कई परिचितों को संबंधित जमीन दिखाई और शिक्षक होने का परिचय देकर खरीदारों का भरोसा जीता। इसके बाद जमीन दलाल केशव देवांगन के माध्यम से जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ी। खरीदारों का कहना है कि जमीन खरीदते समय उन्हें रास्ते को लेकर भरोसा दिलाया गया था, लेकिन खरीदारी के बाद वास्तविक स्थिति सामने आने पर वे परेशान हो गए।
पहले भी शिकायत होने का दावा
स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि शिक्षक मनहरण सिन्हा के खिलाफ पूर्व में भी जमीन संबंधी गतिविधियों को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद उन्हें दूसरे ब्लॉक के स्कूल में भेजे जाने की बात कही जा रही है। बाद में गुरुर ब्लॉक के कनेरी स्थित शासकीय हाई स्कूल में उनका स्थानांतरण होने और फिर से जमीन संबंधी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, पूर्व शिकायत, विभागीय कार्रवाई और स्थानांतरण के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इस संबंध में शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
पुलिस आरक्षक सहित करीब 20 खरीदार परेशान
जमीन खरीदार पुलिस आरक्षक मनोज कुमार साहू के अनुसार, उन्हें जमीन दिखाते समय रास्ते की जानकारी दी गई थी। लेकिन वर्तमान में उस ओर नगर पंचायत का मणिकंचन केंद्र और जनपद पंचायत की बाउंड्रीवाल होने से आवागमन का रास्ता नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि करीब 20 खरीदार इस समस्या को लेकर नगर पंचायत के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका है।
खरीदारों के मुताबिक, जमीन खरीदने में किसी ने कर्ज लिया है तो किसी ने जीवनभर की बचत लगा दी है। रास्ता नहीं होने के कारण वे मकान निर्माण सहित अन्य जरूरी कार्य नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उनकी मांग है कि जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों, रास्ते की स्थिति और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
रास्ता खुलवाने के नाम पर पैसे मांगने की चर्चा
मामले में नगर पंचायत के कुछ कर्मचारियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खरीदारों के बीच चर्चा है कि रास्ता खुलवाने के नाम पर अलग-अलग लोगों द्वारा खर्चा-पानी मांगे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस कथित मांग की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसी शिकायतें सामने आती हैं, तो प्रशासन को उनकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ अनुचित व्यवहार न हो।
जमीन के दस्तावेजों और रास्ते की हो जांच
इस पूरे मामले में प्रमुख सवाल यह है कि जमीन बेचने से पहले रास्ते की वास्तविक स्थिति क्या थी? क्या संबंधित भूखंडों तक पहुंचने के लिए वैध रास्ता उपलब्ध था? नगर पंचायत का मणिकंचन केंद्र किस भूमि पर और किन परिस्थितियों में बनाया गया? जनपद पंचायत की बाउंड्रीवाल तथा जमीन के रास्ते का आपसी संबंध क्या है? इन सवालों का जवाब राजस्व अभिलेखों, नक्शे, सीमांकन और जमीन की रजिस्ट्री की जांच से ही सामने आ सकता है।
खरीदारों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर रास्ते की समस्या का समाधान करने तथा दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, नगर पंचायत और शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। ,,,एक शिक्षक जमीन दलाली नही कर सकता है वह ट्यूशन तक नही पढा सकता है वह समाज का आदर्श होता। डोमेन्द्र कुमार भूआर्य ए बी ओ गुरुर,,,
इन सवालों के जवाब जरूरी
– क्या शिक्षक के विरुद्ध पूर्व में हुई शिकायतों पर विभागीय कार्रवाई की गई थी?
– जमीन की बिक्री के समय रास्ते की वैधानिक स्थिति क्या थी?
– मणिकंचन केंद्र और जनपद पंचायत की बाउंड्रीवाल के कारण रास्ता बाधित हुआ है या नहीं?
– रास्ता खुलवाने के नाम पर कथित रूप से पैसे मांगने की शिकायतों की जांच कौन करेगा?
– करीब 20 जमीन खरीदारों को राहत दिलाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा?

