अमेरिका में आज मिडटर्म चुनाव की वोटिंग, ट्रंप की लोकप्रियता का होगा टेस्ट! रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच किसका पलड़ा भारी?
अमेरिका की राजनीति के लिए आज यानी 3 नवंबर का दिन बेहद अहम है। देश में मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों पर फैसला होगा। इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता और उनकी नीतियों को लेकर जनता का रुख भी सामने आएगा।
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति बने करीब दो साल हो चुके हैं। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव को राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच होने वाले चुनाव के रूप में देखा जाता है। हालांकि, इन चुनावों में हार या जीत से राष्ट्रपति की कुर्सी पर सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन संसद में किस पार्टी का बहुमत होगा, यह जरूर तय होता है।
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में मुकाबला
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं। पहला प्रतिनिधि सभा और दूसरा सीनेट। प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सीटें हैं और हर दो साल में इसके सभी सदस्यों का चुनाव होता है।
वहीं, अमेरिकी सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। सीनेटर का कार्यकाल छह साल का होता है और हर दो साल में लगभग एक तिहाई सीटों पर चुनाव कराया जाता है। इस बार करीब 35 सीटों पर मतदान होना है।
मौजूदा स्थिति में प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के 218 और डेमोक्रेटिक पार्टी के 214 सदस्य हैं। वहीं, सीनेट में रिपब्लिकन के 53 और डेमोक्रेटिक पार्टी के 45 सदस्य हैं।
ट्रंप की कुर्सी पर कितना असर पड़ेगा?
मध्यावधि चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी अपना बहुमत गंवा देती है तो राष्ट्रपति ट्रंप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि, इससे उनका राष्ट्रपति पद समाप्त नहीं होगा।
अमेरिका में बड़े कानूनों और सरकारी नीतियों को लागू करने के लिए संसद का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में अगर डेमोक्रेटिक पार्टी किसी एक या दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप के कई प्रस्तावित बिलों और योजनाओं पर रोक लग सकती है।
खास तौर पर इमिग्रेशन, टैरिफ और दूसरे बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करना रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
क्या कहता है मध्यावधि चुनाव का इतिहास?
अमेरिका के पिछले मध्यावधि चुनावों का रिकॉर्ड बताता है कि अधिकतर मौकों पर राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। इतिहास में 1998 में बिल क्लिंटन और 2002 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में राष्ट्रपति की पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया था।
यही वजह है कि इस बार भी रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर पूरी दुनिया की नजर है।
सर्वे में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त
चुनाव से पहले सामने आए कई सर्वे में डेमोक्रेटिक पार्टी को रिपब्लिकन पार्टी के मुकाबले बेहतर स्थिति में बताया जा रहा है। हालांकि, सर्वे के अनुमान कितने सही साबित होंगे, इसका फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद ही होगा।
ट्रंप की विदेश नीति का भी होगा टेस्ट
इन चुनावों को सिर्फ अमेरिकी संसद की सीटों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। ईरान, इजराइल, रूस-यूक्रेन युद्ध और टैरिफ जैसे मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन के फैसलों को लेकर भी जनता की राय सामने आएगी।
अगर रिपब्लिकन पार्टी बेहतर प्रदर्शन करती है तो ट्रंप को अपने एजेंडे पर आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलने पर राष्ट्रपति के फैसलों और नीतियों की संसदीय जांच-पड़ताल बढ़ सकती है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे 4 नवंबर से आने शुरू होने की उम्मीद है। इन नतीजों का असर न सिर्फ ट्रंप के बचे हुए कार्यकाल पर, बल्कि 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।
