राजस्थान पंचायत चुनाव में बड़ा उलटफेर! विधायक के बेटे और कांग्रेस नेता की भाभी हारीं, कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
राजस्थान में पंचायत चुनाव के नतीजों ने कई सियासी परिवारों को बड़ा झटका दिया है। कहीं विधायकों के रिश्तेदार चुनाव हार गए तो कहीं बड़े नेताओं के परिवारों ने जीत का परचम लहराया है। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव में कई ऐसे नतीजे सामने आए हैं, जिन्होंने सबको चौंका दिया है।
दरअसल, राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के तीसरे चरण के लिए 5 नवंबर को मतदान कराया गया। प्रदेश के 27 जिलों की 3 हजार 716 ग्राम पंचायतों में वोटिंग हुई। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चला। इस दौरान मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और कुल 82.32 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
मतदान खत्म होने के बाद गुरुवार देर रात से ही नतीजे आने शुरू हो गए। जैसे-जैसे परिणाम सामने आए, वैसे-वैसे कई बड़े राजनीतिक परिवारों की हार और जीत की तस्वीर साफ होती गई।
विधायक के बेटे और कांग्रेस नेता की भाभी को मिली हार
सबसे पहले बात करते हैं सलूंबर की, जहां बीजेपी विधायक शांता मीणा के बेटे कपिल मीणा सरपंच का चुनाव हार गए। इतना ही नहीं, वह शुरुआती तीन स्थानों में भी जगह नहीं बना पाए।
वहीं उदयपुर से कांग्रेस विधायक दयाराम परमार की भाभी कमल परमार को भी हार का सामना करना पड़ा। महुवाल ग्राम पंचायत में स्थानीय उम्मीदवार जमना देवी ने उन्हें शिकस्त दी।
कहीं नेताओं के परिवार में जश्न, तो कहीं हार से झटका
दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक परिवारों के लिए ये चुनाव खुशियां लेकर आए। टोंक के देवली में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज की पत्नी शोभा भारद्वाज ने जीत दर्ज की।
वहीं चित्तौड़गढ़ से निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की चाची तममा कंवर भी चुनाव जीत गईं।
जीत के बाद हिंसा, आगजनी और पथराव
इन चुनावों में जीत-हार के साथ विवाद भी देखने को मिला। उदयपुर जिले की खेरवाड़ा पंचायत समिति की नवाघरा ग्राम पंचायत में पुष्पादेवी की जीत के बाद हारे हुए प्रत्याशी के समर्थकों ने कथित तौर पर जमकर हंगामा किया।
इस दौरान तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की घटनाएं सामने आईं। हालात बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करनी पड़ी।
वहीं जालोर जिले की भैंसवाड़ा ग्राम पंचायत में शारदा कुमारी राणा ने छह करोड़पति उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की। उनकी जीत भी चुनाव की सबसे चर्चित खबरों में शामिल रही।
सिर्फ एक वोट से जीत, टोंक की सबसे छोटी पंचायत को मिला सरपंच
अब बात करते हैं चुनाव के सबसे दिलचस्प मुकाबले की। भरतपुर जिले की बयाना पंचायत समिति की दर्र बराहना ग्राम पंचायत में मतगणना दो बार कराई गई। आखिरकार विमला कुमारी ने महज एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
वहीं टोंक जिले की बीसलपुर ग्राम पंचायत को पहली बार सरपंच मिला है। राजस्थान की सबसे छोटी ग्राम पंचायत कही जाने वाली बीसलपुर से नौसर देवी भील ने 151 वोटों से जीत हासिल की।
कहां हुई सबसे ज्यादा और सबसे कम वोटिंग?
अगर मतदान प्रतिशत की बात करें तो तीसरे चरण में कुल 82.32 प्रतिशत मतदान हुआ। सबसे ज्यादा मतदान हनुमानगढ़ जिले के पल्लू में 92.05 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद किशनगढ़ बास में 90.64 प्रतिशत वोटिंग हुई।
जबकि सबसे कम मतदान बालोतरा की समदड़ी पंचायत समिति में दर्ज किया गया, जहां 64.81 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
कुल मिलाकर राजस्थान के पंचायत चुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ गांवों की सत्ता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई बड़े राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी रही। इन नतीजों ने साफ कर दिया कि पंचायत चुनाव में स्थानीय मतदाता बड़े राजनीतिक रसूख पर भी भारी पड़ सकते हैं।
