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गुरुर: सुशासन तिहार नहीं, जनता की समस्याओं से ध्यान भटकाने का अभियान : हिमांशु लावत्रे, पानी, बिजली और खाद के लिए भटक रही जनता, ग्राम पंचायतों से लगभग 5 से-10 हजार रुपये लेकर मनाया जा रहा सुशासन तिहार।

गुरुर। कांग्रेस के युवा नेता हिमांशु लावत्रे ने राज्य सरकार द्वारा आयोजित सुशासन तिहार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि यह कार्यक्रम सुशासन का उत्सव नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का एक प्रयास बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश और क्षेत्र की जनता आज भी पेयजल संकट, बिजली कटौती और किसानों के लिए खाद की कमी जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन सरकार इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय आयोजन और प्रचार-प्रसार में व्यस्त है।
हिमांशु लावत्रे ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग पेयजल की समस्या से परेशान हैं। कई गांवों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है और लोगों को दूर-दूर से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दूसरी ओर बिजली व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है। बार-बार होने वाली बिजली कटौती से आम नागरिकों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि खेती-किसानी का समय शुरू होने वाला है, लेकिन किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सहकारी समितियों और केंद्रों में किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान आवश्यक संसाधनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
कांग्रेस युवा नेता ने आरोप लगाया कि सुशासन तिहार के आयोजन के लिए ग्राम पंचायतों पर आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है। पंचायतों से लगभग 5 से-10 हजार रुपये की राशि मांगी जा रही है, जबकि पंचायतों के पास पहले से ही विकास कार्यों के लिए सीमित बजट है। उन्होंने कहा कि यह राशि गांवों में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता और अन्य आवश्यक विकास कार्यों पर खर्च हो सकती थी, लेकिन उसे कार्यक्रमों के आयोजन में खर्च कराया जा रहा है।
लावत्रे ने कहा कि सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि जब गांवों में पानी नहीं है, किसानों को खाद नहीं मिल रही है और बिजली व्यवस्था बदहाल है, तब सुशासन का दावा किस आधार पर किया जा रहा है। केवल मंच लगाकर, भाषण देकर और सरकारी योजनाओं का प्रचार कर देने से सुशासन स्थापित नहीं हो जाता। सुशासन का वास्तविक अर्थ जनता की समस्याओं का समय पर समाधान और लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की जनता जवाब चाहती है कि जब पंचायतों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिल पा रही है, तब उनसे सुशासन तिहार के नाम पर आर्थिक योगदान क्यों लिया जा रहा है। सरकार को पहले ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए और पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना चाहिए।
हिमांशु लावत्रे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा जनता के हितों की आवाज उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी। यदि सरकार ने पेयजल संकट, बिजली समस्या और किसानों को खाद उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो कांग्रेस कार्यकर्ता जनता के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
अंत में उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को दिखावटी आयोजनों की नहीं, बल्कि वास्तविक सुशासन और विकास की आवश्यकता है। सरकार को प्रचार से अधिक जनसमस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए, तभी सुशासन के दावों पर जनता विश्वास करेगी।

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