CJP प्रदर्शन पर पाकिस्तान और विदेशी मीडिया की नजर, POK को लेकर पाक पत्रकार ने उठाए सवाल
भारत में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन की गूंज अब पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच गई है। पाकिस्तान के कई न्यूज चैनल इस आंदोलन को लगातार कवर कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान की पत्रकार कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने अपने ही देश के मीडिया की कवरेज पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पाकिस्तानी टीवी चैनल भारत की राजधानी दिल्ली में हो रहे प्रदर्शन को तो प्रमुखता से दिखा रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी POK के हालात पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि पाकिस्तान का नेशनल मीडिया कश्मीर की जमीनी हकीकत कब दिखाएगा।
बताया जा रहा है कि POK में पिछले कुछ समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। वहां कई नेता पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और कुछ संगठनों ने अलगाव की मांग भी की है। आरोप है कि प्रदर्शन को रोकने के लिए सख्ती की गई है, लेकिन इन घटनाओं को पाकिस्तानी मीडिया में ज्यादा जगह नहीं मिल रही।
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने भी की रिपोर्टिंग
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने भारत में चल रहे प्रदर्शन पर रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिला। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ राजनीतिक अवसर के तौर पर देखा।
डॉन ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा कि युवाओं से जुड़े मुद्दे, खासकर रोजगार और शिक्षा जैसे विषय, भारत की राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।
जियो न्यूज और अल जजीरा ने भी दिखाई कवरेज
पाकिस्तान के जियो न्यूज ने भी इस मामले पर रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में विपक्षी नेताओं के बयानों और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र किया गया।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जजीरा ने भी इस आंदोलन को जगह दी। उसकी रिपोर्ट में प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं की हिरासत और सरकार के सामने बढ़ती चुनौतियों का उल्लेख किया गया।
सरकार के लिए बढ़ती चुनौती?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह आंदोलन अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें अलग-अलग वर्गों के लोग भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में इसे सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक बहस के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं, पाकिस्तान में इस आंदोलन की कवरेज के बीच वहां के पत्रकारों का एक वर्ग अपने देश के मीडिया से POK जैसे मुद्दों पर भी निष्पक्ष रिपोर्टिंग की मांग कर रहा है।

