बीजेपी के गढ़ में उपचुनाव की अग्निपरीक्षा, बिहार-मध्य प्रदेश और गुजरात के नतीजों पर सबकी नजर
बीजेपी शासित बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनावों की मतगणना जारी है। इन तीनों राज्यों की सीटों पर आए नतीजे सिर्फ स्थानीय राजनीति ही नहीं, बल्कि युवा वोटरों के रुझान और हाल के राजनीतिक माहौल का भी संकेत माने जा रहे हैं। खास तौर पर बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट सबसे हॉट सीट बनकर उभरी है।
पेपर लीक के मुद्दे पर देशभर में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद यह पहला चुनाव है। ऐसे में इन उपचुनावों के नतीजों को विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।
बांकीपुर: बीजेपी का अभेद्य गढ़
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है। यहां से बीजेपी का उम्मीदवार कभी चुनाव नहीं हारा। राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे से यह सीट खाली हुई थी।
दिलचस्प बात यह रही कि पहले घोषित बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने नामांकन के एक दिन बाद पारिवारिक कारणों का हवाला देकर अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी ने युवा मोर्चा के नेता नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा। विपक्ष ने इस फैसले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी को अपनी ही सीट पर हार का डर सता रहा था।
दतिया: नरोत्तम मिश्रा के गढ़ में कांटे की टक्कर
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद खाली हुई थी। यहां बीजेपी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच सीधा मुकाबला है।
दतिया को पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का गढ़ माना जाता है। उन्होंने 2008 से 2018 तक लगातार तीन बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार बीजेपी द्वारा उम्मीदवार बदलने से मिश्रा समर्थकों में नाराजगी भी देखने को मिली।
कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह शाही परिवार से आते हैं और 1993 व 2003 में दतिया से विधायक रह चुके हैं। वे अपनी व्यक्तिगत साख, पुराने जनाधार और बीजेपी के भीतर असंतोष के सहारे चुनावी मुकाबले में उतरे हैं।
मंजलपुर: बीजेपी बनाम कांग्रेस की सीधी लड़ाई
गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट बीजेपी विधायक योगेशभाई नरनदास पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी। वे लगातार तीन बार इस सीट से विधायक चुने गए थे।
इस सीट पर बीजेपी ने पूर्व वडोदरा नगर निगम पार्षद सतीश गोविंदभाई पटेल को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और गुजरात कांग्रेस के उपाध्यक्ष भीखाभाई रबारी पर दांव लगाया है।
अब सभी की नजर इन तीनों सीटों के नतीजों पर टिकी है। खासकर यह देखने पर कि क्या बीजेपी अपने पारंपरिक गढ़ बचा पाएगी या विपक्ष इन उपचुनावों में कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देने में सफल होगा।

