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BJP के पूर्व नेता ने बढ़ाई मुश्किल? यूपी चुनावों में 50 सीटों पर उतारेंगे कैंडिडेट

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की सियासत में एक और संगठन ने चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान किया है। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू ने कहा है कि संगठन यूपी की करीब 50 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा। हालिया बयानों में संगठन की ओर से 50 से 70 सीटों तक चुनाव लड़ने की बात भी सामने आई है।

सूरजपाल सिंह अम्मू ने साफ किया है कि वह खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन करणी सेना के युवा कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में उतारा जाएगा। उनका कहना है कि संगठन किसी राजनीतिक दल का गुलाम नहीं है और अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला कर सकता है।

अम्मू ने यह भी कहा कि चुनाव को लेकर संगठन अभी अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। किन सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाएंगे और किसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन होगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा।

बीजेपी से दूरी का संकेत?

सूरजपाल अम्मू पहले बीजेपी से जुड़े रहे हैं, लेकिन अब करणी सेना के जरिए अलग राजनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ने की बात कह रहे हैं। अपने बयानों में उन्होंने बीजेपी की सहयोगी दलों को दी जा रही राजनीतिक हिस्सेदारी पर सवाल उठाए हैं।

अम्मू का कहना है कि करणी सेना लंबे समय से समाज के मुद्दों को उठाती रही है और अब संगठन चुनावी राजनीति में भी अपनी भूमिका तलाश रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान जताते हुए यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि करणी सेना किसी राजनीतिक दल के साथ बंधी हुई है।

युवाओं को चुनाव में उतारने की तैयारी

करणी सेना अध्यक्ष ने युवाओं को चुनावी राजनीति में आगे लाने की बात कही है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में युवा आज राजनीति में बदलाव चाहते हैं और संगठन इन्हीं युवाओं को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा है।

अम्मू ने राजनीतिक दलों से जाति और धर्म के आधार पर लोगों को बांटने के बजाय आर्थिक मुद्दों पर ध्यान देने की अपील भी की। उन्होंने जातिगत जनगणना की जगह आर्थिक आधार पर जनगणना की पैरवी की है।

किन मुद्दों पर करणी सेना का जोर?

करणी सेना की ओर से यूपी में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने और गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने जैसी मांगें भी उठाई गई हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का यह ऐलान आगे चलकर किस तरह की चुनावी रणनीति में बदलता है। संगठन किन सीटों को चुनता है, उम्मीदवार कौन होंगे और गठबंधन को लेकर क्या फैसला होता है—इन सवालों पर तस्वीर आने वाले समय में साफ होगी।

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों की चुनावी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे में करणी सेना का चुनाव लड़ने का ऐलान भी राज्य की चुनावी राजनीति में एक नई राजनीतिक गतिविधि के तौर पर देखा जा रहा है।

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