*गुरूर जनपद में ‘लूट का खुला बाजार’! करोड़ों के काम में फूल कमीशन, जनपद सदस्यों को भनक तक नहीं*
– जनपद सीईओ रात्रे और पीओ देवांगन की मिलीभगत से लुट रहा गुरूर ब्लॉक
– चहते ठेकेदारों को कमीशन पर दिया काम, निर्माण कामों में जमकर भ्रष्टाचार
*गुरूर/:* बालोद जिले की जनपद पंचायत गुरूर में विकास के नाम पर डकैती पड़ रही है। जनपद सदस्यों ने सीईओ उमेश रात्रे और जनपद पीओ योगेश देवांगन पर सीधा हमला बोला है। आरोप है कि ब्लॉक के कई गांवों में चल रहे 1 से 11 करोड़ के काम सिर्फ कागजों में सही हैं, धरातल पर स्तरहीन निर्माण है। असल में पूरा सिस्टम ‘कमीशन की सेटिंग’ पर चल रहा है। चुनिंदा ठेकेदारों को मालामाल किया जा रहा है और जनता को घटिया स्टापडेम, भवन और टूटी पुलिया थमाई जा रही हैं।
जनपद पंचायत के कामों को लेकर जनपद सदस्यों में आप खुलकर नाराजगी देखने को मिल रही है। जनपद सदस्य संध्या अजेंद्र साहू फूट-फूट कर भड़कीं। बोलीं, हम चुने हुए सदस्य हैं, पर हमें अपने ही क्षेत्र के काम की भनक तक नहीं। सीईओ साहब और पीओ साहब मिलकर सब तय कर लेते हैं। कौन सा काम कहां होगा, किस ठेकेदार को मिलेगा – सब पहले से फिक्स है। हमसे पूछना तो दूर, वर्क ऑर्डर की कॉपी तक नहीं दी जाती। जनपद सदस्यों का आरोप है कि गुरूर ब्लॉक में चल रहे हर काम में भ्रष्टाचार की बदबू आ रही है। पूल पुलिया, भवन, स्टापडेम बनते ही उखड़ जा रही है। पुलिया में सीमेंट की जगह बालू भरा है। सामुदायिक भवन की नींव ही कच्ची है। पर बिल? फटाफट पास। वजह साफ है – ‘ऊपर तक सेटिंग’ और कमीशन का खुला खेल।
*‘चहेते ठेकेदारों की बंपर लॉटरी, बाकी को ठेंगा’*
जनपद सदस्यों ने कहा कि क्षेत्र के 10 से 11 करोड़ के विभिन्न टेंडर सीधे ‘चहेते ठेकेदारों’ की झोली में डाल दिए गए। नियम-कानून ताक पर। टेंडर प्रक्रिया सिर्फ दिखावा। असली खेल सीईओ और पीओ की मुलाकात में होता है। आरोप है कि काम देने से पहले ही ‘भारी कमीशन’ तय हो जाता है। जो जितना दे, उसका काम उतना पक्का। बाकी ठेकेदार लाइन में लगते रहो। 6 से 7 ठेकेदारों को पूरा काम सौंप दिया गया है। एक ठेकेदारों को 3 करोड़ का काम दिया गया है। सबसे शर्मनाक बात – कई कामों का भूमिपूजन तक नहीं हुआ। सरपंच, सीईओ और पीओ का तिकड़ी गठजोड़ बना हुआ है। सरपंच को ‘हिस्सा’ पहुंचाओ, काम शुरू। जनपद सदस्य को कुछ मत बताओ। गांव में काम चाहिए तो कमीशन दो और काम लो नहीं तो चक्कर काटते रहो।
*पीओ साहब ने फोन ही नहीं उठाया, सीईओ साहब बच रहे*
जब सच्चाई पूछने के लिए जनपद पीओ योगेश देवांगन को फोन लगाया गया तो साहब ने रिसीव करना जरूरी नहीं समझा। मतलब साफ – ‘चोरी भी, सीना जोरी भी’। सीईओ उमेश रात्रे भी ज्यादा कुछ नहीं बोल पाए। शायद जवाब देने लायक कुछ है ही नहीं। कहते हैं फोन में क्या बताऊं… जहां से मांग आती है वहां काम दे रहे हैं। कुछ गांवों के नाम गिनाने पर साहब कहते है… आगे जीरामजी का काम देंगे।
*सदस्यों का अल्टीमेटम: जांच नहीं हुई तो आंदोलन*
जनपद सदस्यों ने दो टूक कह दिया – पूरे ब्लॉक के हर काम की थर्ड पार्टी जांच हो। दोषी अफसरों और ठेकेदारों पर FIR हो, रिकवरी हो। अगर शासन ने आंखें मूंदी तो जनपद सदस्य सड़क पर उतरेंगे। गुरूर की जनता पूछ रही है – 10 से 11 करोड़ का हिसाब कहां है? सीईओ-पीओ जवाब दो। विकास के नाम पर हुई इस खुली लूट का हिसाब अब जनता लेगी। फाइलें चाहे जितनी मोटी हों, सच्चाई इतनी ही पतली है – गुरूर में काम नहीं, कमीशन चल रहा है।
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