*दिग्गजों की फौज उतरी, पर खुद के वार्ड में भाजपा हारी, कांग्रेस की आंधी में उड़ गए कमल के 10 पत्ते*
– हार की जिम्मेदारी लेने से बच रहे भाजपा के नेता, परिणाम के हफ्तेभर बाद भी कोई मंथन नहीं
गुरुर/पलारी।
बालोद जिले के नगर पंचायत पलारी का चुनाव परिणाम भाजपा के लिए करारा तमाचा है। चुनाव जीतने उप मुख्यमंत्री, भाजपा विधायक, पूर्व विधायक, प्रदेश और जिला संगठन के दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी। धुंआधार रैलियां, जनसभाएं, डोर-टू-डोर जनसंपर्क फिर भी नतीजा? शर्मनाक हार।
पलारी में सबसे बड़ा झटका यह कि भाजपा का अध्यक्ष प्रत्याशी अपने ही वार्ड में जनता का भरोसा नहीं जीत पाया। खुद के घर में ही कांग्रेस प्रत्याशी से कम वोट मिले। इससे बड़ा अपमान क्या होगा? 15 वार्ड वाली परिषद में कांग्रेस ने 10 सीटों पर कब्जा जमा लिया। भाजपा सिर्फ 5 वार्ड तक सिमट गई। मतलब 2/3 बहुमत कांग्रेस के पास और भाजपा हाशिए पर। डबल इंजन सरकार की जुमलेबाजी को पलारी की जनता ने नकार दिया।
*‘उम्मीदवार बदलो, संगठन नहीं सुना’ – अब प्रत्याशी पर ठीकरा फोड़ रहे*
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो हार की पटकथा चुनाव से पहले ही लिख दी गई थी। टिकट बंटवारे के समय जमीनी कार्यकर्ताओं ने जिला संगठन से फरियाद की थी – “ये प्रत्याशी नहीं चलेगा, उम्मीदवार बदलो”। लेकिन जिला संगठन ने कार्यकर्ताओं की आवाज को कचरे की तरह अनसुना कर दिया। हनक में लिए गए फैसले का नतीजा अब सबके सामने है। बड़ी हार और बड़ी किरकिरी। कार्यकर्ता पहले ही चेतावनी दे रहे थे कि ये चेहरा जनता को नहीं रास आएगा। आलाकमान ने ‘ऊपर से सेटिंग’ को तरजीह दी, जमीनी हकीकत को नहीं।
*एकजुटता शून्य, ठीकरा फेंको खेल जारी*
हार के बाद भाजपा के भीतर जो नजारा है वो और शर्मनाक है। संगठन में एकजुटता नाम की चीज ही नहीं दिखी। हार की जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं। विधायक दूसरे पर, जिला अध्यक्ष प्रदेश पर, प्रदेश नेता स्थानीय कार्यकर्ताओं पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। सब अपने-अपने बचाव में लगे हैं। कोई आत्ममंथन नहीं, कोई माफी नहीं। इसी फूट का फायदा कांग्रेस ने बखूबी उठाया। जहां भाजपा के नेता अंदर ही अंदर एक-दूसरे की टांग खींच रहे थे, वहीं कांग्रेस एकजुट होकर वार्ड-वार्ड लड़ी। नतीजा – 10-5 का क्लीन स्वीप। हार के बाद अब संगठन के नेता गोलमोल बात कर रहे हैं। कोई जिम्मेदारी लेने सामने ही नहीं आ रहा है।
*जनता ने ‘दिग्गज’ नहीं ‘काम’ चुना*
उप मुख्यमंत्री से लेकर सांसद तक आ गए, पर पलारी की जनता ने साफ कह दिया – “हमें भाषण नहीं, काम चाहिए।” राइस मिल की बदबू, टूटी सड़कें, भ्रष्टाचार के आरोप… इन मुद्दों पर भाजपा के पास जवाब नहीं था। सिर्फ बड़े चेहरे उतार देने से वोट नहीं मिलते।पलारी की हार भाजपा के लिए आईना है। टिकट बंटवारे में ‘हां में हां’ मिलाने वाले चाटुकारों को दरकिनार कर जमीनी कार्यकर्ता की सुनो, वरना अगला चुनाव में भी ऐसा ही ‘सुपड़ा साफ’ होगा। अभी तो सिर्फ नगर पंचायत हारी है, पर ये हार 2027 का ट्रेलर है। संभलो भाजपा वरना पलारी जैसी और हारें तैयार हैं।
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