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गुरूर : 7 एकड़ जमीन हड़पने की कथित साजिश नाकाम! रजिस्ट्रार की सतर्कता से खुली दलालों की पोल, दलालों की दबंगई या सिस्टम को खुली चुनौती?

*7 एकड़ जमीन हड़पने की कथित साजिश नाकाम! रजिस्ट्रार की सतर्कता से खुली दलालों की पोल*

*दलालों की दबंगई या सिस्टम को खुली चुनौती?*
*7 एकड़ जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री पर जांच शुरू*
– कई जमीन दलालों का दावा- हमारी पहुंच ऊपर तक, कुछ नहीं होगा
– दलालों की ‘पहुंचÓ पर उठे सवाल, राजस्व विभाग के अफसरों की मिलीभगत की चर्चा

गुरूर।

गुरुर। गुरूर विकासखंड के ग्राम भूसरेगा में करीब 7 एकड़ कृषि भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। यदि रजिस्ट्रार दस्तावेजों की जांच के दौरान सतर्कता नहीं बरतते, तो करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन कथित तौर पर फर्जी तरीके से किसी और के नाम दर्ज हो सकती थी। रजिस्ट्रार के संदेह के चलते रजिस्ट्री की प्रक्रिया तत्काल रोक दी गई और पूरे मामले की शिकायत सनौद थाने में दर्ज कराई गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हलधर साहू ने आरोप लगाया है कि जिस परिवार की जमीन की रजिस्ट्री कराने का प्रयास किया जा रहा था, वह उनके पारिवारिक संबंधी हैं। उनके अनुसार, रजिस्ट्री के समय परिवार की ओर से केवल एक बुजुर्ग व्यक्ति मौजूद थे, जबकि परिवार का कोई अन्य सदस्य वहां उपस्थित नहीं था। आरोप है कि कुछ दलालों ने कथित रूप से एक अन्य व्यक्ति को बुजुर्ग का पुत्र बताकर पेश किया और उसी के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराने की कोशिश की। मामले ने तब नाटकीय मोड़ लिया जब बुजुर्ग व्यक्ति ने कथित तौर पर उस व्यक्ति को अपना पुत्र मानने से साफ इनकार कर दिया। इसी विरोधाभास ने रजिस्ट्रार को सतर्क कर दिया। दस्तावेजों और पहचान को लेकर संदेह होने पर उन्होंने रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसी फैसले ने कथित फर्जीवाड़े को अंतिम चरण में जाकर रुकवा दिया।

*दलालों और दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े लोगों का फर्जीवाड़ा*
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि पूरे प्रकरण में कथित तौर पर शामिल दलालों के साथ-साथ दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े सभी संबंधित लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। शिकायतकर्ताओं ने पटवारी, तहसील कार्यालय और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कराने की मांग उठाई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित गड़बड़ी किस स्तर तक फैली हुई थी।

*कानून और जिला प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल*
इस पूरे घटनाक्रम के बीच गुरूर क्षेत्र में सक्रिय कुछ कथित दलालों के दावों ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि कुछ लोग खुलेआम यह कहते फिर रहे हैं कि उनकी ‘हर जगह पहुंचÓ है, इसलिए चाहे कितनी भी खबरें प्रकाशित हो जाएं, न उनके खिलाफ कार्रवाई होगी और न ही उनका काम रुकेगा। यदि ऐसे दावे सही साबित होते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था ही नहीं बल्कि कानून के साथ शासन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।

गुरुर क्षेत्र में *चल रहा दलालों का कारनामा*
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से कुछ कथित दलाल भोले-भाले किसानों को लालच और भ्रम में डालकर जमीन के सौदों में फंसाने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में यह मामला केवल एक कथित फर्जी रजिस्ट्री का नहीं, बल्कि पूरी भूमि पंजीयन व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की भी परीक्षा बन गया है।

*शिकायत पर सनौद पुलिस कर रही जांच*
फिलहाल सनौद थाना पुलिस शिकायत के आधार पर जांच कर रही है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब नजर इस बात पर है कि जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या फिर कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर वास्तव में कानून का शिकंजा कसता है।
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