आजम खान की बढ़ीं मुश्किलें, जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में 416 करोड़ के अंतर की ED कर रही जांच
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आजम खान, जौहर ट्रस्ट, मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और ठेकेदारों की कंपनियों के खिलाफ रामपुर के अजीमनगर थाने में FIR दर्ज कराई है. शिकायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं. हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है.
ED की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR के बाद एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए ECIR भी दर्ज की है. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब ED की टीम ने एक दिन पहले रामपुर जेल में आजम खान से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी. अब एजेंसी जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय लेन-देन, निर्माण कार्यों पर हुए खर्च और धन के स्रोतों की पड़ताल कर रही है.
जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च में 416 करोड़ रुपये के अंतर का दावा
ED के मुताबिक, मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बनी इमारतों की अनुमानित निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये है. वहीं, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक कुल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दर्ज किया गया है.
एजेंसी के अनुसार, इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर है. ED अब इस अंतर की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में खर्च हुई रकम का स्रोत क्या था. यह अंतर अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है, बल्कि एजेंसी की जांच का एक अहम बिंदु है.
सरकारी धन और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
ED की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सरकारी ठेकों से जुड़ी निर्माण सामग्री और सरकारी धन का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के निर्माण में किया गया. शिकायत के मुताबिक, ठेकेदारों के जरिए करीब 55.8 करोड़ रुपये, सरकारी कार्यों के माध्यम से 23.41 करोड़ रुपये और विधायक एवं विधान परिषद क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये के काम यूनिवर्सिटी परिसर में कराए गए.
इसके अलावा, एजेंसी ने जौहर ट्रस्ट को मिले कुछ दान की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए हैं. अब इन दान के स्रोतों, निर्माण कार्यों में खर्च की गई रकम और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी.
इन धाराओं में दर्ज हुई FIR
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)(d) और 13(2) का उल्लेख किया गया है. ED की शिकायत के आधार पर दर्ज इस मामले में आजम खान, जौहर ट्रस्ट, ठेकेदारों और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की जाएगी.
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है. जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के इस्तेमाल के आरोपों में क्या तथ्य सामने आते हैं.

