5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज, उत्तराखंड पहुंची चुनाव आयोग की टीम, जानें यूपी को लेकर क्या अपडेट
देश के पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों की टीमें संबंधित राज्यों का दौरा कर चुनावी व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं। फिलहाल चुनाव आयोग की टीम उत्तराखंड में है। इसके बाद अधिकारियों के मणिपुर और पंजाब जाने की योजना है। वहीं, गोवा दौरे के कार्यक्रम में बदलाव किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश के दौरे की तारीखों का अभी ऐलान नहीं हुआ है।
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग मतदान से जुड़ी व्यवस्थाओं, प्रशासनिक तैयारियों और चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा कर रहा है। उप चुनाव आयुक्तों के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग राज्यों में पहुंचकर तैयारियों का आकलन कर रहे हैं। आमतौर पर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त भी संबंधित राज्यों का दौरा करते हैं, ताकि चुनाव की तैयारियों का जायजा लिया जा सके।
किन पांच राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव?
आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में विधानसभा का कार्यकाल अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं और इसका कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है। वहीं, मणिपुर की 60, गोवा की 40, पंजाब की 117 और उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर भी चुनाव कराए जाने हैं। इन चार राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा।
चुनाव आयोग ने इसी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 के प्रावधानों के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले भी चुनाव कराए जा सकते हैं।
EVM और VVPAT की जांच शुरू, यूपी और गोवा में तैयारियां जारी
चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM और वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी VVPAT की जांच भी की जा रही है। उत्तर प्रदेश और गोवा में इन मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इस जांच के दौरान भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) के इंजीनियर मशीनों की तकनीकी स्थिति का परीक्षण करते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदान के दौरान किसी तरह की तकनीकी परेशानी न आए।
जांच में खराबी मिलने पर संबंधित मशीन को मरम्मत या आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्माता कंपनी के पास भेजा जाता है। इस प्रक्रिया के जरिए मतदान से पहले मशीनों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है।
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होता है मॉक पोल
EVM और VVPAT की जांच के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मॉक पोल भी कराया जाता है। यह एक तरह का परीक्षण मतदान होता है, जिसके माध्यम से मशीनों के कामकाज को परखा जाता है। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और मशीनों को लेकर राजनीतिक दलों की आशंकाओं को दूर करना है।
फर्स्ट लेवल चेकिंग चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इसके तहत मशीनों की तकनीकी जांच के साथ उनसे जुड़े पुराने चुनावी डेटा को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हटाया जाता है।
एक EVM व्यवस्था में बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और VVPAT शामिल होते हैं। जांच पूरी होने और मशीन के सही पाए जाने के बाद उस पर ‘FLC OK’ का निशान लगाया जाता है। इसके बाद अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए मशीन को विशेष गुलाबी कागजी सील से सील किया जाता है।
चुनावी तैयारियों पर आयोग की नजर
पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। आयोग की टीमें चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ-साथ मतदान में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की जांच पर भी ध्यान दे रही हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में चुनाव आयोग की टीमें कब दौरा करेंगी और चुनावी कार्यक्रम को लेकर आगे क्या अपडेट सामने आता है।

