अखिलेश यादव के लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, लोकतंत्र की रक्षा, एक्सप्रेसवे निर्माण और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयानों पर बीजेपी नेता चौधरी भूपेंद्र सिंह और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया है। दोनों नेताओं ने अखिलेश यादव पर उनके पुराने राजनीतिक फैसलों और सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर सवाल खड़े किए।
चौधरी भूपेंद्र सिंह ने लोकतंत्र सेनानियों को 51 हजार रुपये सम्मान राशि देने के अखिलेश यादव के ऐलान पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने से पहले सपा प्रमुख को अपने पुराने फैसलों पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के साथ सपा के गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ अखिलेश यादव इमरजेंसी का विरोध करते हैं, जबकि दूसरी तरफ उसी कांग्रेस के साथ राजनीतिक गठबंधन करते हैं।
एक्सप्रेसवे के मुद्दे पर भी भूपेंद्र सिंह ने अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने सपा सरकार के कार्यकाल में सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका दावा है कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में बने एक्सप्रेसवे के निर्माण और रूट को लेकर कई सवाल उठे थे।
पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर भी चौधरी भूपेंद्र सिंह ने सपा सरकार के दौर की एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने शाहजहांपुर में पत्रकार की हत्या के मामले को उठाते हुए सपा सरकार पर सवाल खड़े किए। साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के साथ कथित व्यवहार को लेकर भी हमला बोला।
वहीं, ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की राजनीतिक नीतियों और गठबंधन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ सपा के गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि बाद में अखिलेश यादव ने खुद इसे बड़ी भूल बताया था। राजभर ने मध्य प्रदेश चुनाव का उदाहरण देते हुए भी सपा प्रमुख के पुराने बयानों की याद दिलाई।
इमरजेंसी के मुद्दे पर राजभर ने कांग्रेस के इतिहास का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव से सवाल किया कि जिस पार्टी के शासनकाल में इमरजेंसी लगी थी, उसी के साथ राजनीतिक गठबंधन करने के बाद लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान की बात कैसे की जा सकती है।
राजभर ने अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति में परिवार और धनवान लोगों को ज्यादा महत्व दिया जाता है। हालांकि, PDA को लेकर उनकी यह व्याख्या उनका राजनीतिक आरोप है।
मुस्लिम और दूसरे सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर भी राजभर ने सपा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन से सपा को फायदा मिलता है, लेकिन राज्यसभा जैसे पदों पर प्रतिनिधित्व देने के समय उन्हें पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं मिलती।
राजभर ने डिंपल यादव के निर्विरोध चुनाव का भी जिक्र किया और उस दौरान विरोधी उम्मीदवारों पर कथित दबाव के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विरोधी प्रत्याशियों को पर्चे वापस लेने के लिए मजबूर किया गया था।
कुल मिलाकर, अखिलेश यादव के लोकतंत्र, पत्रकारों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े बयानों पर बीजेपी और उसके सहयोगी दल के नेताओं ने सपा के पुराने कार्यकाल और राजनीतिक फैसलों को मुद्दा बनाकर पलटवार किया है।

