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अनंत सिंह को फांसी दिलाने की जिद!

अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जमानत रद्द होते ही दुलारचंद के परिवार ने लिया बड़ा संकल्प

दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अदालत ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह की जमानत रद्द करते हुए उन्हें एक दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद दुलारचंद यादव के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का आभार जताया है।

दुलारचंद यादव के बड़े पोते नीरज कुमार ने कहा कि परिवार को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। नीरज के मुताबिक, परिवार ने संकल्प लिया है कि जब तक दोषियों को फांसी या उम्रकैद की सजा नहीं मिलती, तब तक दादा का ब्रह्मभोज और पुण्यतिथि नहीं मनाई जाएगी।

नीरज कुमार ने कहा कि परिवार ने न्याय की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब अदालत के फैसले से उन्हें आगे न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। उन्होंने साफ कहा कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए परिवार हर संभव कानूनी कदम उठाएगा।

पीयूष प्रियदर्शी ने भी उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

वहीं, 2025 विधानसभा चुनाव में मोकामा से जन सुराज के प्रत्याशी रहे पीयूष प्रियदर्शी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से गरीब और कमजोर लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की।

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। उस समय वह जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। इस मामले में अनंत सिंह को एक नवंबर 2025 को गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेजा गया था।

करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को उन्हें जमानत दे दी थी। इसके बाद 23 मार्च को वह जेल से बाहर आए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी है। इस फैसले के बाद दुलारचंद यादव के परिवार ने न्याय की लड़ाई को अंतिम अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया है।

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