INS विक्रांत पर उतरा राफेल मरीन, समंदर में भारत की ताकत का नया प्रदर्शन
भारतीय नौसेना ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए राफेल मरीन लड़ाकू विमान को स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत पर सफलतापूर्वक उतार दिया है। 29 अक्टूबर को हुई इस पहली लैंडिंग के साथ ही भारतीय नौसेना के समुद्री लड़ाकू अभियानों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ गया है।
नौसेना ने इस ऐतिहासिक परीक्षण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। खास बात यह रही कि राफेल मरीन ने विमानवाहक पोत के सीमित उड़ान डेक पर पहली ही कोशिश में सफल लैंडिंग की। यह उपलब्धि भारतीय नौसेना के पायलटों की ट्रेनिंग और तकनीकी दक्षता को भी दर्शाती है।
दरअसल, किसी एयरक्राफ्ट कैरियर पर लड़ाकू विमान उतारना सामान्य रनवे पर लैंडिंग करने से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। समुद्र के बीच मौजूद जहाज के छोटे से डेक पर विमान की रफ्तार और दिशा को बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित करना पड़ता है। इसके लिए पायलटों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
राफेल मरीन को खासतौर पर समुद्री अभियानों और विमानवाहक पोत से संचालन के लिए तैयार किया गया है। INS विक्रांत पर इसकी सफल लैंडिंग से अब विमान और स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर के बीच तकनीकी अनुकूलता की जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।
गौरतलब है कि INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसे देश में ही तैयार किया गया है। राफेल मरीन जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान के इसके डेक पर उतरने से भारतीय नौसेना की कैरियर आधारित युद्धक क्षमता को विकसित करने की दिशा में नई संभावनाएं पैदा हुई हैं।
पाकिस्तान की बढ़ी चिंता?
राफेल मरीन की INS विक्रांत पर सफल लैंडिंग को हिंद महासागर में भारत की समुद्री रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सामरिक संतुलन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं। हालांकि, इस परीक्षण का अगला चरण और विमान का परिचालन में शामिल होना अभी महत्वपूर्ण रहेगा।
अब सबकी नजरें राफेल मरीन के आगामी परीक्षणों पर टिकी हैं, जिनकी सफलता भारतीय नौसेना की समुद्री हवाई ताकत को एक नया आयाम दे सकती है।
