उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी मुकाबला लगातार तेज होता जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के नामांकन के दौरान बीजेपी खेमे की एक तस्वीर सामने आई, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोशल मीडिया पर शेयर किया। इस तस्वीर के बाद बीजेपी ने सपा के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें अखिलेश यादव बीजेपी और उसके सहयोगी दलों में सेंध लगाने की बात कह रहे थे।
दरअसल, मंगलवार को बीजेपी के सभी आठ उम्मीदवारों ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपना दल सोनेलाल के नेता और मंत्री आशीष पटेल, निषाद पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद समेत एनडीए के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।
यही तस्वीर अब यूपी की सियासत में चर्चा का विषय बनी हुई है। बीजेपी इस मौजूदगी को एनडीए की एकजुटता के तौर पर पेश कर रही है। पार्टी का कहना है कि सहयोगी दल पूरी मजबूती के साथ बीजेपी के साथ खड़े हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन में किसी तरह की टूट की गुंजाइश नहीं है।
वहीं, समाजवादी पार्टी की तरफ से भी बीजेपी के खिलाफ रणनीति बनाने के संकेत दिए जा रहे थे। माना जा रहा था कि सपा राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारकर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के कुछ विधायकों को अपने पाले में ला सकती है।
लेकिन अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इन अटकलों पर लगभग विराम लगा दिया। उन्होंने लिखा— “अब हमारा ध्यान तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है।”
यानी सपा ने राज्यसभा की तीसरी सीट की बजाय सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव पर फोकस करने का संकेत दे दिया है।
इसी बीच बीजेपी ने सपा के बागी विधायकों को लेकर भी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। नामांकन के दौरान सपा के बागी विधायक अभय सिंह और राकेश सिंह बीजेपी खेमे के नेताओं के साथ नजर आए। इससे बीजेपी को अखिलेश यादव के उस दावे पर हमला करने का मौका मिल गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर बागी विधायक वापस आना चाहेंगे तो उन्हें साथ लिया जाएगा।
इससे एक दिन पहले सपा के बागी विधायक विनोद चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी की थी। ऐसे में बीजेपी खेमा अब इन घटनाओं को सपा के लिए सियासी झटका बता रहा है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी दावा किया कि सपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव में हार मान ली है।
उधर, बीजेपी ने राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की भी कोशिश की है। पार्टी के आठ उम्मीदवारों में ओबीसी, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण और क्षत्रिय समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया गया है। दो महिला उम्मीदवारों को भी जगह मिली है।
बीजेपी की ओर से धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार, विद्यासागर सोनकर, प्रियंका रावत, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडे और राम प्रताप सिंह चौहान ने नामांकन दाखिल किया।
वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी पहले ही नामांकन कर चुके हैं।
राज्यसभा की 10 सीटों के लिए नामांकन की आखिरी तारीख मंगलवार थी। अगर अंतिम समय में कोई बदलाव नहीं होता है तो सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है।
अब बड़ा सवाल यही है कि राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार से पीछे हटने के बाद क्या अखिलेश यादव का पूरा फोकस 2027 के 403 विधानसभा सीटों वाले मुकाबले पर है? और क्या बीजेपी के साथ उसके सहयोगी दलों की यह तस्वीर वास्तव में यूपी में एनडीए की मजबूती का संकेत है?
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन तस्वीरों और बयानों ने यूपी की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है।

