ग्रेटर नोएडा। जिले के औद्योगिक सेक्टरों में श्रमिकों द्वारा अचानक शुरू किए गए आंदोलन ने पुलिस, प्रशासन, उद्यमियों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सड़कों पर प्रदर्शन, फैक्ट्रियों के बाहर नारेबाजी और वाहनों मेंं तोड़फोड़ करने जैसी घटनाओं के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर शासन और प्रशासन से बिना मांग किए वेतन वृद्धि के लिए अचानक इतना बड़ा आंदोलन किसी साजिश कर परिणाम तो नहीं है।ऐसी आंशका है कि श्रमिकों के बीच कुछ ऐसे उपद्रवी थे, जिन्होंने सिर्फ फैक्ट्रियों को निशाना बनाया। उनके हाथों में थैले थे, उनमें पत्थर थे।
थैलों में पत्थर से प्रतीत होता है कि फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ व वाहनों में आगजनी अचानक गुस्से का परिणाम नहीं थी, बल्कि पूर्व नियोजित था। पुलिस इसकी जांच में जुटी है। श्रमिकों के बीच उपद्रवियों की भी पहचान की जा रही है। यह चर्चा आम है कि यदि आंदोलन साजिश है तो यह भी पुलिस और प्रशासन की नाकामी का परिणाम है। पुलिस और प्रशासन को पूर्व नियोजित साजिश की भनक क्यों नहीं लगी, इस पर भी सवाल खड़ा हो गया है।उद्यमियों का कहना है कि श्रमिको को अपनी मांगें जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचानी चाहिए थीं। प्रशासन और प्रबंधन के साथ बातचीत कर समाधान निकाला जा सकता था, लेकिन सीधे आंदोलन का फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ करना और वाहनों में आग लगाना उचित नहीं है। इससे उद्योगों के साथ-साथ आम लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कामगारों का इतना बड़ा वर्ग एक साथ कैसे एकजुट हो गया। कहीं इसके पीछे कोई संगठित रणनीति तो नहीं। कुछ सूत्रों के अनुसार, इस आंदोलन को बड़ा रूप देने में बाहरी संगठनों और विचारधारा आधारित समूहों का भी सहयोग मिल रहा है।
ग्रेटर नोएडा में श्रमिक आंदोलन से हड़कंप, साजिश की आशंका पर जांच तेज

